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विधानसभा चुनाव 2020 : बेनीपट्टी सीट से चुनावी ताल ठोंकने की तैयारी कर रहे यह 13 चेहरे



बिहार विधानसभा चुनाव में अब 10 महीने से भी कम का वक्त बचा है. ऐसे में झारखंड चुनाव के समापन और नए साल की दस्तक के साथ ही चुनाव को लेकर उम्मीदवारों की लामबंदी टिकट फाइनल करने को लेकर तेज हो गई है. राज्य के परिप्रेक्ष्य में महागठबंधन और एनडीए का स्वरूप चुनाव में क्या रहेगा यह फिलहाल कहना मुश्किल है. 

झारखंड चुनाव में शिकस्त खाने वाली बीजेपी के पास सबसे बड़ी चुनौती सीटों के बंटवारे पर जदयू और लोजपा के साथ ताल-मेल बिठाना होगा. तो महागठबंधन के लिए अपने छोटे दलों को साथ लेकर चलना चुनौतीपूर्ण रहेगा. राजनितिक गलियारों में इन आशंकाओं को भी बल मिल रहा है कि एनडीए के मुख्य घटक दल जदयू एन वक्त पर अपना अलग रास्ता भी अख्तियार कर सकती है. खैर एनडीए के अंदर अच्छी बात यह भी है कि एनडीए में नीतीश कुमार के चेहरे पर चुनाव लड़ने की सहमति पहले ही बन चुकी है. लेकिन महागठबंधन से सीएम का चेहरा कौन होगा, यह अब तक साफ नहीं है. ऐसे में राजद ने एकतरफा फैसला लेते हुए तेजस्वी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित चुकी है. तेजस्वी के लिए विरोधियों के साथ साथ अपनों से भी निपटना बड़ी चुनौती है. तेजस्वी को अब यह सोचना है कि महागठबंधन में शमिल छोटे दलों को साथ लेकर कैसे चला जाए. क्योंकि सीएम पद के लिए तेजस्वी के नाम पर और सीट बंटवारे को लेकर नरम रुख के साथ महागठबंधन की मुख्य घटक दल कांग्रेस राजद के साथ नजर तो आ रही है, लेकिन छोटे दल जीतन राम मांझी की हम पार्टी, मुकेश सहनी की वीआईपी और कुशवाहा की रालोसपा, महागठबंधन के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है. मांझी ने चुनावी बिगुल बजने से पहले ही बगावती तेवर दिखा दिए हैं. वहीं एनडीए के घटक दल लोजपा ने 119 सीटों पर चुनाव की तैयारी करने की बात कहकर एनडीए को समय रहते सीट बंटवारे पर चिंता करने का कारण दे दिया है.

इन राजनितिक हालातों में बेनीपट्टी विधानसभा सीट की बात की जानी जरूरी है. क्योंकि इस सीट से दावेदारी तय करने के लिए उम्मीदवारों की चहलकदमी अब जोरों पर है. सभी अपनी-अपनी दावेदारी टिकट फाइनल करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाये हुए हैं. ऐसे में किस दल से कौन दावा ठोकते नजर आ रहे हैं और कौन संभावित उम्मीदवार हो सकते हैं - देखिये यह रिपोर्ट. 

घनश्याम ठाकुर - बीजेपी



चुनाव में बीजेपी के निःवर्तमान जिलाध्यक्ष घनश्याम ठाकुर की दावेदारी बीजेपी से काफी मजबूत मानी जा रही है. हाल में ही घनश्याम ठाकुर मधुबनी जिलाध्यक्ष पद से मुक्त हुए हैं. जिसके बाद से उनकी दावेदारी को और भी बल मिल रहा है. जिसका कारण नवम्बर महीने में राजधानी पटना में पार्टी पदाधिकारियों, चुनाव प्रभारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ हुई बीजेपी की बैठक में बीजेपी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा दिया गया बयान है जिसमें नड्डा ने साफ़ कहा था कि बीजेपी जिलाध्यक्षों को विधानसभा चुनाव में पार्टी टिकट नहीं देगी. माना जा रहा है कि इसी कारण से घनश्याम ठाकुर को जिलाध्यक्ष पद से हटाया गया है. पिछले सालों में घनश्याम ठाकुर की गतिविधियां और मौजूदगी बेनीपट्टी में अधिक देखी गई है. वहीं हाल में संपन्न हुए पैक्स चुनाव के बाद घनश्याम ठाकुर बेनीपट्टी विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न पैक्स से निर्वाचित पैक्स अध्यक्षों को पंचायतों में घूम-घूमकर सम्मानित करते हुए नजर आ रहे हैं. इसे भी घनश्याम ठाकुर की चुनावी तैयारी ही मानी जा रही है. इसके अलावे बीजेपी के शीर्ष सूत्रों की मानें तो पार्टी ने इन्हें चुनाव को लेकर हरी झंडी दिखा दी है.

विनोद नारायण झा - बीजेपी


बीजेपी के तरफ से प्रबल दावेदारों में बेनीपट्टी के पूर्व विधायक व वर्तमान में एमएलसी मंत्री विनोद नारायण झा भी हैं.  हांलाकि बिहार विधानसभा चुनाव तक विनोद नारायण झा का एमएलसी कार्यकाल बांकी ही रहेगा, जिसके कारण यह उम्मीद की जा रही है कि वह 2020 का विधानसभा चुनाव नहीं लड़ें. इसके पीछे का एक कारण यह भी माना जा रहा है कि पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी से विनोद नारायण झा मधुबनी या झंझारपुर से लोकसभा टिकट की उम्मीद कर रहे थे, हालंकि ऐसा हुआ नहीं. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि विधानसभा के बाद विधान परिषद में दस्तक देने वाले विनोद नारायण झा आने वाले समय में लोकसभा में पहुंचने की तैयारी करते हुए नजर आएं. बता दें कि 2015 के विधानसभा चुनाव में विनोद नारायण झा को 51244 मत मिले थे और वह अपने प्रतिद्वंदी कांग्रेस उम्मीदवार भावना झा से 4734  वोट से हार गये थे. हालंकि 2010 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में विनोद नारायण झा 31198 वोट लाकर विजयी हुए थे. लेकिन 2015  में वोट 2010 की अपेक्षा 20 हज़ार से अधिक वोट लाने के बावजूद भी उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. 

जटाशंकर झा - जदयू


मधुबनी नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी से सेवानिवृत्त होने वाले जटाशंकर झा जदयू के तरफ से विधानसभा चुनाव में दावेदार माने जा रहे हैं. पार्टी में इनकी पहुंच अच्छी खासी है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी में ज्वाइन करने के बाद बहुत ही कम दिनों में उन्हें पार्टी ने जदयू शिक्षा प्रकोष्ठ की प्रदेश उपाध्यक्ष की कमान सौंप दी है. पिछले कुछ महीनों में जटाशंकर झा की गतिविधि बेनीपट्टी मुख्यालय में काफी देखने के लिए मिली है. आये दिन वह बेनीपट्टी दौरे पर जदयू के नेताओं के साथ नजर आते हैं. 

नीरज झा - जदयू/निर्दलीय 


कांग्रेस से नाराज होकर वर्षों पहले जदयू को आशियाना बनाने वाले नीरज झा जदयू के तरफ से प्रबल दावेदार हैं. पूर्व नीरज झा कई दफे जदयू की टिकट पर चुनाव लड़ने की मंशा जाहिर कर चुके हैं. वह कई सालों से पार्टी की सेवा में लगे हुए हैं. नीरज झा इससे पहले जिला परिषद भी निर्वाचित रहे हैं. फिलहाल वह पार्टी में जिला उपाध्यक्ष पद पर हैं. इनकी दावेदारी स्थानीय होने के साथ पार्टी में सक्रीय भूमिका निभाने को लेकर भी मजबूत मानी जा रही है. हालंकि सूत्रों की मानें तो नीरज झा पार्टी हो या निर्दलीय, वह चुनावी मैदान में नजर आएंगे.

विनोद शंकर झा लड्डू - जदयू/निर्दलीय


विनोद शंकर झा लड्डू मरीन चीफ इंजिनियर हैं और शिवनगर गांव निवासी हैं. पिछले कई सालों से सामाजिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं. बीजेपी से जुड़ाव रखने वाले विनोद शंकर झा लड्डू आगामी विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमाते हुए नजर आ सकते हैं. विनोद शंकर झा लड्डू बीजेपी की टिकट पर या निर्दलीय चुनाव लड़ने की मंशा पहले भी जाहिर कर चुके हैं. हालांकि सूत्रों की मानें तो वह जल्द ही बीजेपी से किनारा कर सकते हैं. साथ ही जदयू शीर्षकमान के इशारे पर टिकट की दावेदारी के साथ वह जदयू में शामिल हो सकते हैं. 


रामाशीष यादव - राजद 


रामाशीष यादव बेनीपट्टी विधानसभा सीट से वर्ष 2000 में जदयू के टिकट पर चुनाव जीतकर आये थे, जिसके बाद उन्होंने राजद के तरफ रुख कर लिया.  2015 के विधानसभा चुनाव में हरलाखी सीट से रामाशीष यादव राजद से बागी होकर निर्दलीय मैदान में थे. इस चुनाव में रामाशीष यादव को 21 हज़ार से कुछ अधिक मत मिले थे. इस बार वह पार्टी से बेनीपट्टी सीट से टिकट की आस लगाये हुए हैं. 

राजेश यादव - राजद/निर्दलीय 


राजेश यादव पूर्व में जिला परिषद सदस्य निर्वाचित रहे हैं. फिलहाल इनकी पत्नी सोनी देवी बेनीपट्टी प्रखंड प्रमुख हैं. खुद को राजेश यादव राजद का प्रखंड अध्यक्ष बताते हैं. लेकिन कथित तौर पर बेनीपट्टी राजद के दो खेमे में बंटे होने की बात सर्वविदित है. एक खेमा जहां राजेश यादव को अध्यक्ष मान रहा है तो दूसरा खेमा राजद नेता पूर्व जिप सदस्य कामेश्वर यादव को प्रखंड अध्यक्ष मानता है. खैर इन हालातों के वाबजूद राजेश यादव राजद से टिकट की आश में हैं. उम्मीद यह भी की जा रही है कि राजेश यादव को पार्टी टिकट नहीं भी देती है तो वह निर्दलीय चुनाव लड़ सकते हैं.


भावना झा - कांग्रेस


भावना झा बेनीपट्टी सीट से जीती हुई विधायक हैं. भावना झा ने सबसे पहले 2010 में बेनीपट्टी सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें भारी अंतर से बीजेपी के उम्मीदवार विनोद नारायण झा से हार का सामना करना पड़ा था. हालांकि 2015 के चुनाव में भावना झा ने वापसी करते हुए कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतने में कामयाब रही थी. भावना झा ने बीजेपी के उम्मीदवार विनोद नारायण झा को 4734 मतों से शिकस्त दी थी. हालांकि इस बार अगर यह सीट महागठबंधन में कांग्रेस के खाते में जाती है तो देखना दिलचस्प होगा कि फिर से भावना झा को कांग्रेस उम्मीदवार बनाती है या नहीं. क्योंकि लोकसभा चुनाव के दौरान महागठबंधन से बागी होकर मधुबनी लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने के कारण कांग्रेस नेता पूर्व केन्द्रीय मंत्री शकील अहमद और शकील अहमद को सहयोग करने के आरोप में विधायक भावना झा पर पार्टी ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए पार्टी से निलंबित कर दिया था. हालांकि बीते दिनों में भावना झा पार्टी के कार्यक्रमों में कई जगह शिरकत करती हुई नजर आईं हैं. ऐसे में पार्टी का क्या फैसला होता है यह वक्त बताएगा. लेकिन भावना झा चुनावी मैदान में मजबूती के साथ होंगी इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है. 


कृपानंद झा आज़ाद - सीपीआई



कृपानंद झा आज़ाद नवकरही के रहने वाले हैं. वह सीपीआई से एक बार फिर चुनावी मैदान में नजर आ सकते हैं. इससे पहले भी कृपानंद झा आज़ाद तीन बार बेनीपट्टी सीट से चुनावी मैदान में नजर आएं हैं, लेकिन जीत का जादुई आंकड़े से वो हर बार काफी पीछे छुट जाते हैं. हालांकि कृपानंद झा आज़ाद को पिछले दो चुनावों में मिले मत को देखें तो यह साफ़ प्रतीत होता है बेनीपट्टी सीट पर सीपीआई के जितने भी वोट हैं वह सुरक्षित है. अगर सीपीआई किसी के साथ गठबंधन में नहीं जाती है तो यह आगामी चुनाव में किसी का भी खेल बिगाड़ सकती है. बता दें कि 2015 के विधानसभा चुनाव में जीत-हार का फासला करीब 4 हज़ार मतों का था. वहीं सीपीआई उम्मीदवार कृपानंद झा आज़ाद को 2015 के चुनाव में 9758 मत, वहीं 2010 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में 9693 मत मिले थे. जो कि किसी के चुनावी गणित को बिगाड़ने के लिए काफी है.



विजय मिश्रा - सीपीआई



विजय मिश्रा सीपीआई के तरफ से बेनीपट्टी सीट पर नए उम्मीदवार के रूप में नजर आ सकते हैं. अंदरखाने से मिली जानकारी के अनुसार वह चुनाव को लेकर तैयारी में लगे हुए हैं. सीपीआई के तरफ से इनकी दावेदारी को इसलिए भी बल मिल रहा है कि पूर्व के तीन विधानसभा चुनावों में सीपीआई ने बेनीपट्टी सीट से कृपानंद झा आज़ाद पर भरोसा तो जताया है, लेकिन वह पार्टी को अब तक जीत दिलाने में कामयाब नहीं रहे हैं. ऐसे में पार्टी भी नए उम्मीदवार को प्राथमिकता देना चाहेगी. विजय मिश्रा फिलहाल सीपीआई के राज्य परिषद के सदस्य हैं. साथ ही विजय मिश्रा मैथिली सिने जगत के स्थापित कलाकार भी हैं. विजय मिश्रा अब तक कई फिल्मों सीरियल में अपना अभिनय का जलवा दिखा चुके हैं.



मिहित चौधरी - शिवसेना



मिहित चौधरी चानपुरा बसैठ के रहने वाले हैं. वह शिवसेना की टिकट पर बेनीपट्टी सीट से उम्मीदवार हो सकते हैं. सामाजिक कार्यों में रूचि रखते हैं. 



ललन किशोर झा - निर्दलीय



ललन किशोर झा बेनीपट्टी विधानसभा सीट से एक बार फिर से निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए नजर आ सकते हैं. इससे पहले भी ललन किशोर झा विधानसभा सीट से निर्दलीय चुनाव में किस्मत आजमा चुके हैं. हालांकि उनकी मानें तो वह बीजेपी से टिकट की उम्मीद करते हैं.



अरविंद मिश्रा मयंक - निर्दलीय 


अरविंद मिश्रा मयंक भी निर्दलीय चुनावी मैदान में नजर आ सकते हैं. इस बाबत फेसबुक पर अरविंद मिश्रा मयंक खुद का जोर-शोर से प्रचार-प्रसार कर रहे हैं. इनकी निर्दलीय दावेदारी तय मानी जा रही है. अरविंद मिश्रा मयंक दावा करते हैं कि अगर इनकी जीत होती है तो वह 15 सालों में बीजेपी जदयू के शाषण काल की सभी फाइलें खोल जांच करवाएंगे और किसी को नहीं बख्शा जाएगा. अरविंद मिश्रा मयंक अपने प्रचार प्रसार के लिए Arvind Mishra For CM of Bihar सहित दर्जनों फेसबुक ग्रुप बनाकर चुनावी तैयारी में लग गये हैं. 



अरविंद मिश्रा मयंक द्वारा चुनाव को लेकर बनाये गये सोशल मीडिया ग्रुप्स 



अगली कड़ी बहुत जल्द - विधानसभा चुनाव 2020 में हरलाखी सीट से चुनावी ताल ठोंकने वाले संभावित चेहरों की सूची.

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