गाण्डीवेश्वर नाथ मंदिर में सवा पहर विराजते है महादेव - BNN News

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13 Feb 2018

गाण्डीवेश्वर नाथ मंदिर में सवा पहर विराजते है महादेव

बेनीपट्टी(मधुबनी)। प्रखंड मुख्यालय से 12 किमी दूर बाबा गाण्डीवेश्वर नाथ महादेव मंदिर अवस्थित है। शिवनगर गांव के मुख्य द्वार के समीप विराजमान साक्षात महादेव मंदिर सदियों से आस्था का प्रतीक रहा है। बावजूद बिहार सरकार के द्वारा अभी तक मंदिर को पर्यटन स्थल के तौर पर घोषित नहीं किया गया है। जिसके कारण मंदिर का अब तक पूर्ण विकास नहीं हो पाया है। जबकि गाण्डीवेश्वर नाथ महादेव मंदिर को कई बार पर्यटन स्थल के तौर पर घोषित करने का प्रयास किया गया। प्रशासनिक रिपोर्ट भेजे जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस पहल नहीं हो पाया है। इस गांव का पौराणिक नाम गंग्येय से गंडेश्वर फिर वर्तमान में शिवनगर के नाम से प्रचलित है। जन-श्रुतियों, साहित्यिक कथाओं(हेरीटेज ऑफ मिथिला,शिवनगर गाम गाथा , मिथिला दर्पण, महाभारत विराट-पर्व गीता प्रेस और अन्य पुस्तकों द्वारा जानकारी उपलब्ध है कि महाभारत कालीन इस स्थल के समीप विशाल, अगम्य शमी पेड़ के धोधर में पांडवों ने अपना गांडिव-धनुष, तरकश, वस्त्र और अन्य शस्त्र को छुपा कर रख दिए। दुर्गन्ध से लोग इस ओर नहीं पहुंचे इसलिए नकुल ने पास के श्मशान  से  लाश लाकर शमी पेड़ पर लटका दिए। और यहीं गांडिवेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना कर पशुपति अस्त्र प्राप्त किए। फिर पांडवों ने विराटनगर( आधुनिक नेपाल में स्थित )को चले गए। अज्ञातवाश समाप्ति के दो दिन पहले कौरवों ने विराटनगर पर आक्रमण किया जहां अर्जुन राजा  विराट के पुत्र उत्तम कुमार का सारथी बनकर शिवनगर आए और अपने वस्त्र -गांडिव धारण किए फिर अग्निदेव की प्रार्थना से दिव्यरथ प्राप्त कर कौरवों के  खिलाफ युद्ध को तैयार हुए। एक तीर  पाताल में चलाया तो गंगा की उत्पति हुई इसमें स्नान कर युद्धोन्मुख हुए । युद्ध पर विजय प्राप्त लौटने पर महादेव को स्थापित किए जिसे आज वाणेश्वर महादेव के नाम से जानते हैं। और दूसरा तीर अपने गुरु द्रोणाचार्य के चरणों के लिए चलाया। वर्तमान में गांडिवेश्वर स्थल पर आठ मंदिर हैं । मुख्य मंदिर में प्रवेश की दिशा पश्चिम है स्थित शिवलिंग समान्य हैं जो 5000 ईं पू.महाभारत कालीन हैं। इसी शिवलिंग की पूजा कर अर्जुन ने पशुपति अस्त्र प्राप्त किया था। दूसरे  मंदिर के लगभग 15 फीट नीचे स्थित गर्भ गृह में गौरी-शंकर की लिंग स्थापित है। यह गर्भ गृह  गृष्म ऋतु  में  जलमग्न रहता है जो कि भक्तों के दृष्टि से आश्चर्य का विषय है। तीसरा मंदिर दक्षिण की दिशा में स्थित काल भैरब का है । चौथा और मुख्य मंदिर के सामने मंदिर में शिव -पार्वती युगल प्रतीमा है जो सर्वथा लाल कपड़े से ढका रहता है। दक्षिण -पश्चिम कोण पर स्थित पांचवा मंदिर नमोनाथ मंदिर जो सूर्य मंदिर है। इस मंदिर के मूर्ति पर स्थित शिलालेख और शिला चित्र इसके अति प्राचीनतम होने का प्रमाण है।

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