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समाज में जागरुकता फैलाना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण अंग : एसडीएम

बेनीपट्टी (मधुबनी)। राष्ट्रीय सेवा योजना का मकसद है कि समाज में व्याप्त कुरीति को खत्म करने के साथ समाज सेवा का भाव। समाज में बेहतर माहौल देने के साथ लोगों की सेवा करना मकसद होना चाहिए। ये बातें शुक्रवार को उच्चैठ के कालिदास विद्यापति साईंस कॉलेज के सभागार में आयोजित एनएसएस कार्यक्रम का विधिवत् उद्घाटन कर छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए एसडीएम मुकेश रंजन ने कहा। श्री रंजन ने कहा कि सिर्फ शैक्षणिक प्रमाणपत्र के लिए ही नहीं शिक्षा ग्रहण करनी चाहिए। शिक्षा का मौलिक रुप को अपनाने की आवश्यकता है। जिससे समाज को लाभ मिले। वहीं एसडीएम ने उपस्थित छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि पूरे हिन्दुस्तान में दो शक्ति की ही चर्चा की जाती है। नारी शक्ति एवं युवा शक्ति, एसडीएम ने कहा कि ये दोनों शक्ति अगर मन में ठान लें, तो हर कुरीति को समाप्त किया जा सकता है। एसडीएम ने कहा कि बाल विवाह व दहेज प्रथा के खिलाफ भी युवा शक्ति को आगे आने की आवश्यकता है, ताकि समाज में फैले इस कुरीति को जड़ से समाप्त किया जायें। उन्होंनें कहा कि आज समाज में 20 प्रतिशत ही ऐसे लोग होंगे, जो खुशी से कह सकते है, कि उन्होंने बेटी की शादी में समान अथवा अन्य कोई चीजें बेटी की शादी में दी है। या, फिर दहेज देने की बात करते है। देश में 80 प्रतिशत ऐसे लोग है तो अपने बेटी की शादी के लिए जमीन बेच देते है, या अन्य कीमती सामान को औने-पौने दामों पर बिक्री कर बेटी की शादी करते है। एसडीएम ने कहा कि अब समय आ गया है कि इस कुरीति को समाप्त किया जा सके। उन्होंनें सभी छात्र-छात्राओं को हर समय समाज के भलाई के लिए कार्य करते का आह्वान किया। इससे पूर्व एसडीएम मुकेश रंजन, महाविद्यालय के प्राचार्य डा. मंगलानंद मिश्र, प्रो. योगानंद झा व डा. दुर्गा झा ने संयुक्त रुप से दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की विधिवत् शुरुआत की। कॉलेज प्रशासन की ओर से एसडीएम को पाग-दोपट्टा देकर सम्मानित किया गया। वहीं कॉलेज की छात्राओं ने मंगलाचरण एवं देवी गीत पेशकर कार्यक्रम में शामिल होने के लिए एसडीएम का स्वागत किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कॉलेज के प्राचार्य डा. मिश्रा ने कहा कि एनएसएस के मूल रुप से जानने के लिए सिर्फ शिविर में उपस्थिति ही काफी नहीं है। इसके लिए इसके मूल चीजों को समाज में फैलाना मकसद होना चाहिए। वृक्षारोपण, समाज में फैले कुरीति को समाप्त करने, साक्षरता के प्रति लोगों को जागरुक करने सहित कई ऐसे कार्य करते रहना चाहिए, जिससे समाज को शिक्षा के मूल प्रभाव को देखने का लाभ मिले। मौके पर प्रो. गंगा प्रसाद यादव, दिनेश पाठक, सत्यम झा, नारायण जी झा, अरुण कुमार झा, रविन्द्र झा, शैलेन्द्र कुमार सिंह सहित कई कॉलेज कर्मी व शिक्षक उपस्थित थे।

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