रामायण व महाभारत सर्किंट से जुड़े मंदिरों को तीर्थ स्थल घोषित करने से होगा मिथिला का विकास : अभिजीत - BNN News

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19 Jun 2018

रामायण व महाभारत सर्किंट से जुड़े मंदिरों को तीर्थ स्थल घोषित करने से होगा मिथिला का विकास : अभिजीत

बेनीपट्टी(मधुबनी)। मिथिलाचंल का विकास सिर्फ सड़क व पुल के निर्माण से नहीं होगा, सदियों से मिथिलाचंल में सड़क व पुल-पुलियों का निर्माण होता रहा है। बावजूद मिथिला का विकास कहां है? क्यूं नहीं हुआ मिथिलाचंल का विकास? उल्टे मिथिला की संस्कृति विलोपित हो रही है। मिथिलाचंल में पलायन का दर्द ऐसा है कि हर घर से एक न एक सदस्य दूसरे प्रदेश में जाकर आजीविका के लिए मेहनत-मजदूरी कर रहे है। ऐसा ही स्थिति रहा तो मिथिला व मिथिला की संस्कृति पूरी तरह से तबाह हो जाएगी। इसे संरक्षण के लिए युवाओं को राजनीतिक फंडा से हटकर आगे आना होगा। राजनीति अपने जगह होनी चाहिए, लेकिन सर्वप्रथम मिथिला का विकास होना चाहिए। ये बातें मिथिला देशम् के संस्थापक अभिजीत सिंह ने रविवार की देर शाम नगवास के पूर्व मुखिया राकेश कुमार सिंह उर्फ रिक्की के आवासीय परिसर पर हुई मिथिला के समुचित विकास के नाम पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा। श्री सिंह ने कहा कि जिस मिथिलाचंल को विद्वान व देवी-देवताओं की धरती की संज्ञा दी गई है। साक्षात महादेव उगना बनकर चाकरी की। कपिल मुनि की कपिलेश्वर, वशिष्ठ मुनि की बसैठ, लोमस श्रृषि की लोमा, फुलहर, कलना, सिद्धपीठ उच्चैठ भगवती, गाण्डीवेश्वर नाथ महादेव मंदिर, बाणेश्वर नाथ, भगवती सीता की प्रकट स्थल पुनौराधाम हो, इतने सारे तीर्थ स्थल है। जिसका विकास कर सभी स्थलों को तीर्थ स्थल के तौर पर घोषित हो जाए, तो मिथिलाचंल का कुछ विकास संभव है। इस तीर्थ स्थल से लोगों को रोजगार के साथ हर स्तर पर विकास हो सकता है। वहीं श्री सिंह ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि अब राजनीति के जगह पर सामूहिक रुप से मिथिला का विकास के प्रति सोचे, कि कैसे मिथिलाचंल में लघु उद्योग व कुटीर उद्योग लगा कर पलायन को रोका जा सके। वहीं उन्होंने सभी युवाओं को मिथिला के विकास के लिए सतत प्रयास करने की अपील करते हुए कहा कि जब तक आप मिथिला पुत्र बनकर नहीं सोचेंगे, तब तक विकास नहीं हो सकता है। युवा हर जगह अपनी मैथिली भाषा का प्रचारित करें और इसे अमल में लाए। संगोष्ठी में शामिल युवाओं ने सामूहिक रुप से मिथिला के विकास के लिए सतत प्रयास करने एवं मुहिम को बल देने का संकल्प लिया। संगोष्ठी में नरेश प्रसाद चौधरी, चंदन कुमार सिंह, सरोज सिंह, सिंहेश्वर साह, राजू कुमार साफी, गौतम सदा, गोविन्द सिंह, राजाबाबू साह, संजय कुमार सिंह, गुलाब राय, ओम कुमार, गोपाल मुखिया, हीरा कुमार, सज्जन कुमार, सोनू राय, मनोज कुमार समेत कई युवाओं ने अपने विचार प्रकट किए।

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