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कमरों व संसाधन के अभाव में हलकान हो रहे लीलाधर उच्च विद्यालय के छात्र

बेनीपट्टी (मधुबनी)। बेनीपट्टी अनुमंडल का एतिहासिक श्री लीलाधर उच्च विद्यालय प्लस टू विभागीय उदासीनता एवं लापरवाही का शिकार हो रहा है। शिक्षा विभाग ने भले ही स्कूल को प्लस टू का दर्जा देकर सम्मान देने का प्रयास किया, परंतु विभागीय पेंच के कारण प्लस टू की पढ़ाई तो दूर स्कूल में संसाधन व शिक्षकों की कमी के कारण माध्यमिक शिक्षा पर भी ग्रहण लगता जा रहा है। जिसकी चिंता न तो स्कूल प्रशासन को है, न ही शिक्षा महकमा को। वर्ष-1946 में स्थापित श्री लीलाधर उच्च विद्यालय का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है। यहां से शिक्षा ग्रहण कर कई छात्र आईएएस तो कई छात्र अन्य सरकारी महकमा में पद संभाल कर स्कूल का नाम रौशन करने का काम किया है। शिक्षाविद्ों की माने तो उस समय बेनीपट्टी के आसपास मात्र एक ही उच्च विद्यालय हुआ करता था। जहां मुख्यालय के आसपास सहित सुदूर ग्रामीण इलाकों के छात्र पढ़ाई करते थे। दूर के छात्रों के लिए छात्रावास की सुविधा थी। परंतु , अब उक्त सुविधा तो दूर स्कूल के पास वर्गवार संचालन के लिए न तो शिक्षक ही है, ओर न ही स्कूल के पास कमरा, जहां छात्रों को शिक्षा दी जा सके।
                  संसाधन के नाम पर स्कूल के हाथ खाली
कभी अपने गौरवशाली अतीत को देख झूम रहे श्री लीलाधर उच्च विद्यालय आज विभागीय लापरवाही के दंश के कारण संसाधन की कमी से जूझ रहा है। स्कूल में शैक्षनिक गतिविधि को प्रारंभ करने के लिए स्थापना काल के कुछ ही वर्षों के बाद निर्मित भवन अब पूर्णरुप से जर्जरता का शिकार हो चुके है। स्कूल के नौ कमरों में पढ़ाई कराना अब खतरे से बाहर नहीं है। स्कूल में खेल-कूद का सामान हो या उपस्कर की कमी, हर कमी से जूझ रहा स्कूल में पर्याप्त मात्रा में कुर्सी तक नहीं है। स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों की संख्या को देख स्कूल के पास शौचालय, फर्नीचर सहित कई अन्य संसाधन की घोर किल्लत बनी हुई है। जिसे देख यहां के शिक्षाविद् भी काफी दुखी है। बावजूद एतिहासिक स्कूल के मूल चीजों को बचाने के लिए विभाग आगे तक नहीं आ रही है। स्कूल में करीब नामांकित 1400 छात्रों के लिए एक मात्र शौचालय जरुरत के मुताबिक काफी कम है। जबकि स्कूल के पास भूखंड की कोई कमी नहीं है। बावजूद स्कूल के पास संसाधन के नाम पर कुछ भी नहीं है। हैरत है कि इतने बड़े स्कूल के पास शुद्ध पेयजल मुहैया कराने के लिए एक भी चापाकल नहीं है। जो समस्याओं को उजागर करने के लिए काफी है।
           1400 छात्रों के लिए विषयवार शिक्षक की किल्लत
अपने स्वर्णीम इतिहास को संजोये श्री लीलाधर उच्च विद्यालय में फिलवक्त करीब 1400 छात्रा नामांकित है। एक आंकड़ा के मुताबित रोजाना करीब आठ सौ छात्र अध्यन के लिए स्कूल आते है। स्कूल में नामांकित छात्रों को पढ़ाने के लिए प्रभारी प्रधानाध्यापक सहित बीस शिक्षकों की फौज है, बावजूद विषयवार शिक्षक के नहीं होने के कारण छात्र अक्सर महत्वपूर्ण विषय को पढने से वंचित रह जाते है। जानकारी के मुताबित श्री लीलाधर उच्च विद्यालय में फिलहाल अंग्रेजी, भूगोल, संस्कृत, उर्दू, सामाजिक विज्ञान जैसे अतिमहत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक का पद वर्षों से रिक्त पड़ा हुआ है। जिसके कारण छात्र इस अतिमहत्वपूर्ण विषय को सही तरीके से पढ़ने व समझने से वंचित हो रहे है।
                             कीमती लकड़ी हो रही बर्बाद
श्री लीलाधर उच्च विद्यालय में स्कूल प्रबंधन के लापरवाही के कारण दर्जनों कीमती लकड़ी बर्बाद हो रही है। धूप व पानी में सड़ने के कारण लकड़ी की वाजिब दाम तो मिलना दूर अब कोई ऐसी स्थिति हो गयी है कि उक्त लकड़ी का कोई खरीदार भी सामने नहीं आएगा। गौरतलब है कि स्कूल के कई कमरा जर्जर होकर ध्वस्त हो गये। उपरांत स्कूल प्रबंधन ने उक्त मलबे से कीमती लकड़ी को किनारे लगा कर छोड़ दिया। शिक्षा समिति के बैठक में उक्त लकड़ी के निलाम करने के पचड़ा में फंसने के बजाय उक्त लकड़ी को बर्बाद होने देने में ही संभवतः पूर्व प्रभारी अपना हितकारी समझ रहे थे, जिसके कारण आज तक उक्त लकड़ी की निलामी नहीं हो पायी। सूत्रों की माने तो पूर्व एसडीएम मिथिलेश मिश्रा उक्त लकड़ी के बर्बाद होने पर चिंता जाहिर कर निलाम कराने का पहल किये हुए थे। परंतु विभागीय जाल में फंस कर उक्त पहल भी कामयाब नहीं हो पायी। उधर मिथिलेश मिश्रा का तबादला हो गया, उधर निलामी की चर्चा भी गायब हो गयी।
             स्कूल के समस्याओं पर बोलें प्रभारी प्रधानाध्यापक
स्कूल में मूलभूत सुविधाओं की घोर किल्लत पर श्री लीलाधर उच्च विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक अशोक कुमार ने बताया कि स्कूल की समस्याओं पर हर स्तर पर जानकारी दी गयी है। शिक्षकों की भरपाई कराने का प्रयास किया जा रहा है। उपलब्ध शिक्षकों से ही सभी विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। प्रभारी ने बताया कि फिलहाल प्लस टू के तीनों संकाय में करीब चार दर्जन से अधिक छात्र नामांकित है। छात्रों को पढ़ाने के लिए प्लस टू में सात शिक्षक व माध्यमिक में 14 शिक्षक है। प्रभारी ने बताया कि कमरों के अभाव के कारण अधिक समस्या हो रही है।

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