तीन वर्षों से अधर में लटका मलहामोर पूल का निर्माण शुरु - BNN News

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4 Jul 2020

तीन वर्षों से अधर में लटका मलहामोर पूल का निर्माण शुरु

बेनीपट्टी(मधुबनी)। बेनीपट्टी-साहरघाट पथ के मलहामोर के समीप तीन वर्षों से अधर में लटक चूके पूल का निर्माण कार्य प्रारंभ हो गया है। पथ निर्माण विभाग के द्वारा नए सिरे से 1 करोड़ 74 लाख की लागत से पूल का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण कार्य का भार सीतामढ़ी के विजय श्री प्रोजेक्ट प्रा. लिमिटेड को दी गई है। तीन माह में पूल निर्माण कार्य पूर्ण कर लिए जाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसको लेकर एक दर्जन से अधिक मजदूरों को लगाया गया है।

ब्लैक लिस्टेड होने के कारण अधर में लटक गया था पूल

मलहामोर के समीप करीब चार वर्ष पूर्व विभाग के आदेश पर संवेदक के द्वारा निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया। संवेदक के लेटलतीफी के कारण समय पर पूल का निर्माण आधा भी नहीं हुआ। जबकि, इस निर्माण अवधि में दो वार बाढ़ आने से उच्चैठ व साहरघाट का आवागमन कई दिनों तक पूर्णरुप से प्रभावित रहा। जिसकी शिकायत पर पूर्व डीएम एसके अशोक ने विभागीय अधिकारियों के साथ पूल निर्माण स्थल का जायजा लेकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। जिसके बाद विभाग के द्वारा पूल निर्माण का अवलोकन कर पूर्व के संवेदक को ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया। काफी प्रयास के बाद आखिरकार फिर से रीटेंडरिंग हुई और 5 करोड़ में से बचे 1.74 करोड़ की राशि से पूल निर्माण कार्य पूरा कराने की जिम्मेवारी दी गई। निर्माण स्थल पर कार्य करा रहे एक कर्मी अखिलेश कुमार ने बताया कि पूल के दोनों किनारे का फ्लेंक निर्माण कार्य कराया जा रहा है। इसके बाद बिंब डाला जायेगा और उसके बाद मिट्टीकरण करा ढलाई का कार्य पूरे किये जायेंगे। इसके बाद अंतिम चरण में कालीकरण कर एप्रोच से जोड़ दिया जायेगा और पूल से होकर आवागमन बहाल कर दिया जायेगा। इस बाबत संवेदक विजय कुमार ने कहा कि बाढ़ और बारिश ने बाधा नही पहुंचाई तो तीन महीने में पूरा कर लिया जायेगा।

पूल निर्माण पर बोले, स्थानीय लोग व श्रद्धालु

बेतौना पंचायत के मुखिया लीला देवी, पूर्व मुखिया प्रभात कुमार कर्ण पूर्व सरपंच शौकत अली नूरी, जितेंद्र भंडारी, मुकेश झा, प्रकाश झा, भक्त आनंद कुमार झा, दुकानदार रंजीत साह, विजय साह, दिलीप साह, उच्चैठ के पंडा सुरेंद्र गिरि, राश गिरि, प्रकाश गिरि, देबू गिरि, सहित कई लोगों ने बताया कि वर्षो से पुल निर्माण अधूरा रहने के कारण आवागमन में सभी को परेशानी होती थी। बाढ़ के समय उच्चैठ और बसबरिया आना जाना मुश्किल हो जाता था। पूल के निर्माण पूर्ण होने से आवाजाही की संकट समाप्त हो जाएगी।

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