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बेनीपट्टी अनुमंडल में जनता पर हावी हो रही पुलिस प्रशासन, खूब चल रहा वर्दी का रौब


बेनीपट्टी (मधुबनी) : मधुबनी जिले के बेनीपट्टी अनुमंडल क्षेत्र में आम जनता पर पुलिस प्रशासन पूरी तरह हावी हो चुकी है। पिछले कुछ महीनों में हुई आपराधिक घटनाओं, घटना-दुर्घटनाओं, धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम जिसमें आम जनों के आक्रोश, मांगों पर प्रशासन के तरफ से सामंजस्य बैठाने की आवश्यकता थी, उन जगहों पर पुलिस प्रशासन खुद को पीपुल फ्रेंडली साबित करने में पूरी तरह से नाकाम रही है। हाल में बेनीपट्टी अनुमंडल क्षेत्र अंतर्गत कई ऐसे मामले सामने आये हैं जिनमें साफ़ प्रतीत होता है कि या तो प्रशासन के प्रति लोगों का गुस्सा चरम पर है और पुलिस इस मौके की ताक में रहती है कि प्रशासन के खिलाफ लोग आवाज उठाएं और इधर विधि व्यवस्था के नाम पर उन पर FIR लाद दिया जाय। यूं समझें तो बेनीपट्टी अनुमंडल क्षेत्र में पुलिस प्रशासन पहले जनता के आक्रोश को बढ़ने दे रही है, फिर जब मामला नियंत्रण से बाहर होता है तो उन पर मुकदमा कर देती है।

हाल में ही दिवाली के दिन बेनीपट्टी बाज़ार में एक अनियंत्रित ट्रक ने तांडव मचाया। नशे में गाड़ी के ड्राईवर ने बाज़ार में कई जगह गाड़ियों और टक्कर मारते हुए राहगीरों को भी टक्कर मार दी, जिसमें कुल 3 लोग असमय काल के गाल में समा गये। जिनमें एक जरैल गांव के और बांकी 2 सरिसब गांव के मृतक थे। आक्रोशित ग्रामीणों ने घटना के बाद शव के साथ सरिसब छोटू चौक के पास सड़क जाम कर दिया। दिवाली जैसे दिन में उक्त स्थल पर लोग अपने घरों की दिवाली छोड़ घंटो रात तक सड़क जाम कर इस आश में थे कि प्रशासन आएगी, हम लोगों की बात सुनी जाएगी और मुआवजा का आश्वासन मिलेगा। लेकिन बेनीपट्टी थाना क्षेत्र के सुरक्षा का कमान संभाल रहे थानाध्यक्ष महेंद्र सिंह घटना के बाद घायलों के इलाज, शवों के पोस्टमार्टम इत्यादि प्रकिया में लगे थे और जहां सड़क जाम हुई थी वहां देर से पहुंचे, यही वजह रही कि उनकों लोगों का अति आक्रोश का सामना करना पड़ा। जिसका परिणाम यह हुआ कि एक तो घटना में 3 लोगों की मौत हुई और दूसरी मौत से आहत आक्रोशित लोगों के आक्रोश को प्रशासन झेलने में इस कदर नाकाम रही कि भविष्य में इस तरह की स्थितियों से नहीं सामना करना पड़े इसके लिए सड़क जाम करने के नाम पर सैकड़ों अज्ञात के नाम एफआईआर कर दी गई। सड़क जाम में जो लोग शामिल थे वह अब भयभीत हैं कि पुलिस क्या करेगी।

बता दें कि प्रशासन के तरफ से की जाने वाली अज्ञात के नाम एफआईआर, प्रशासन के लिए रामबाण का काम करती है। जिसमें नाम जोड़ने हटाने के नाम पर बहुत कुछ संभावनाएं होती है, जो प्रशासन के लिए आपदा को अवसर में बदलने का मौका देती है। घटना-दुर्घटनाओं के बाद धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम में स्वभाविक रूप से भीड़ जुट जाती है। और जब FIR होती है तो लोग भयभीत हो जाते हैं, प्रशासन इसका फायदा उठाने से नहीं चुकती है। भयभीत लोगों को मोहरा बनाकर घटना-दुर्घटनाओं के बाद धरना-प्रदर्शन, सड़क जाम में शामिल लोगों के नामों को उगलवा लेती है। फिर नाम जोड़ने हटाने में, केस के आईओ द्वारा अनुसंधान में जमकर खेल होता है और व्यारे न्यारे होते हैं इसी सिस्टम के लोग।

जिन अज्ञातों पर मुकदमा किया गया है उनकी गलती यही थी कि प्रशासन के खिलाफ सड़क जाम किया, जिसका उन्हें परिणाम भुगतना पड़ रहा है। लेकिन जिस प्रशासन के जिम्मे शराबबंदी सरीखे क्षेत्र की विधि व्यवस्था दुरुस्त रखने का जिम्मा है, वह प्रशासन जब अपना काम सही से नहीं करती है इसका न्याय कौन करेगा ? जो ट्रक ड्राईवर नशे में पुरे बाज़ार में तांडव मचाया वह बेनीपट्टी एफसीआई गोदाम में अनाज लेकर आया था, यानी वह सही स्थिति में रहा होगा तभी अनाज लेकर गोदाम तक पहुंचा। उपरांत अनाज उतारने में मजदूरों को घंटों लगे होंगे, इस दौरान ट्रक का ड्राईवर नशे में धुत्त हो जाता है। अगर वह ड्राईवर साथ में शराब की बोतल लेकर आया था तो प्रशासन की वाहन चेकिंग खानापूर्ति ही मानी जाएगी। अगर ड्राईवर ने बेनीपट्टी प्रखंड कार्यालय के पास बनें एफसीआई गोदाम के समीप शराब पिया होगा, या वहीं से शराब का व्यवस्था किया होगा तो यह भी प्रशासन की नाकामी है। 

ये भी नहीं है कि वह ड्राईवर ऐसी जगह शराब पी रहा होगा, जहां उसे कोई नहीं देख सका होगा। या नशे में धुत्त होने के बाद जब वह गाड़ी लेकर निकला होगा तो गोदाम व गोदाम के आस पास के लोग उसके नशे में होने का नहीं पता चला होगा, फिर क्यों किसी ने बेनीपट्टी पुलिस को ड्राईवर के शराब पीने और नशे में होने की जानकारी नहीं दी ? वजह यही है कि, बेनीपट्टी थानाध्यक्ष की कार्यशैली अब तक उस तरह की नहीं रही है कि वह लोगों का विश्वास जीत सकें हों और लोग पुलिस की मदद करने के लिए सामने आयें।

थाना से 500 मीटर की दूरी पर दिवाली के दिन हादसा होता है, अनियंत्रित ट्रक राहगीरों को कुचलती है, सड़क पर खड़ी यात्री से भरे बस में टक्कर मारती है। दिवाली के दिन बाज़ार में भीड़ अधिक होती है, लेकिन बाज़ार में भीड़ के मद्धेनजर ट्रैफिक व्यवस्था के लिए बेनीपट्टी थाना का एक हवलदार भी भीड़-भाड़ वाले इलाकों में नहीं होता है।

कुछ इसी तरह का मामला अरेर थाना अंतर्गत आने वाले ब्रह्मपुरा गांव में देखने के लिए मिला, जहां 25 अक्टूबर को एक युवती घर के काम से बाहर निकलती है। घर वापस नहीं आती है, लोगों को अनहोनी की शंका होती है। परिवार के लोग गांव में तलाश करते हैं, नहीं मिलती है। सभी शक जाहिर करते हैं कि वह घास लाने खेत की तरफ गई थी, वह पानी में भी डूब सकती है। उपरांत पुलिस को जानकारी दी जाती है, अरेर थाना कहती है अपने से तलाश कीजिये अभी। ग्रामीण तलाश करते हैं लेकिन सफलता नहीं मिलती है, जिसके बाद ग्रामीण SDRF को भेजने की अनुरोध करते हैं, पुलिस इसे हल्के में लेके फोन करने वालों को लताड़ लगा देती है। 

करीब दो दिन बाद ग्रामीणों में लड़की का शव पानी में मिलता है। लड़की के मुंह में कपड़ा बंधा हुआ रहता है। पास में ही एक खेत में शराब पीने के उपरांत फेंकी गई प्लास्टिक की ग्लास व कुछ संदेहास्पद चीजें मिलती है। फिर अरेर थाना के थानाध्यक्ष राजकिशोर कुमार दल बल के साथ क्रांति करने पहुंचते हैं। पुलिस की रवैये से लोगों का आक्रोश उफान पर रहता है, जिसके कारण डीएसपी अरुण कुमार को भी मौके पर जाना पड़ता है। जैसे-तैसे शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाता है। अगले दिन गांव के सैकड़ों लोग जिसमें महिलाएं, बच्चे, युवक शामिल रहते हैं, सभी न्याय मार्च निकालते हुए ब्रह्मपुरा से बेनीपट्टी करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर आते हैं। कैंडल जलाकर न्याय मार्च करते हैं, प्रशासन से न्याय की उम्मीद में नारेबाजी होती है। लेकिन अगले ही दिन पता चलता है कि उक्त मामले में पुलिस ने गांव के कुछ लोगों पर नामजद व दर्जनों अज्ञात पर पुलिस के साथ बदसलूकी इत्यादि के आरोप में मुकदमा कर दिया है। करें पन्द्रह दिन बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट आता है जिसमें कहा जाता है कि लड़की की मौत डूबने से हुई थी, लेकिन पुलिस के पास इस सवाल का जवाब नहीं है कि अगर उसकी मौत डूबने से हुई है फिर जब लड़की का शव पानी से निकला तो उसके मुंह में कपड़ा क्यों लपेटा हुआ था ? घटनास्थल के पास के एक खेत में शराब पी हुई ग्लास व चखने के लिए इस्तेमाल की गई चिप्स के पैकेट इत्यादि का मिलना, इस पर पुलिस का क्या जवाब है ?

मामले की फेहरिस्त यहीं नहीं रूकती है, बाढ़ से त्रस्त त्राहिमाम विशनपुर पंचायत की जनता 26 सितम्बर को बाढ़ राहत को लेकर बेनीपट्टी-बसैठ पथ को जाम करती है। जिसमें वह लोग शामिल होते हैं, जो सरकार की राहत घोषणाओं और सरकारी अफसरों के रवैये से नाराज थे। उपरांत लोगों के आक्रोश को शांत कर तत्काल सड़क जाम खुलवाने के लिए आक्रोशितों के मांगों को मान लिए जाने व उचित पहल किये जाने का आश्वासन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा दिया जाता है। लेकिन फिर पता चलता है कि जो जनता कुछ कीमत की बाढ़ राहत राशि व अनाज के लिए सड़क पर आने के लिए मजबूर हुई थी, उन सभी के उपर  बेनीपट्टी की सीओ पल्लवी कुमारी के बयान पर विधि व्यवस्था भंग करने के आरोप में FIR कर दिया गया। कई दिनों तक लोग अपने घरों में नहीं सोयें, जिसमें कुछ लोगों की गिरफ़्तारी भी हो गई। बेनीपट्टी के कर्णधार सरकारी अफसरों के पीपुल फ्रेंडली व्यवहार का नतीजा है कि समाज के वंचित कमजोर लोगों पर प्रशासन का डंडा खूब चल रहा है, जो एक दिन मजदूरी करने के बाद अगले दिन कहां मजदूरी करनी है इस अवसर की तलाश करते हैं, ऐसे लोगों को प्रशासन के खिलाफ जाने पर जेल, वकील, वकालत का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है।

इन सरकारी वर्दीधारियों की तानाशाही का आलम कुछ ऐसा है कि बेनीपट्टी थाना अंतर्गत उच्चैठ में एक युवक की बाइक चोरी हो जाती है, युवक सुबह में थाना पहुँचता है FIR करवाने, लेकिन थानाध्यक्ष महेद्र सिंह उसे रात के 7 बजे तक 4 बार दौड़ाते हैं फिर भी FIR नहीं लेते हैं। युवक को उल्टे फटकार लगाते हुए कहते हैं कि बाइक चोरी ही नहीं हुआ है। बाद में फजीहत होने पर रात को युवक का आवेदन लिया जाता है। इसी तरह चुनाव के समय एकतारा हाई स्कूल में आयोजित जनसभा के दौरान एक युवक की बाइक चोरी हो गई, युवक अरेर थाना पंहुचकर गाड़ी चोरी की एफआईआर करवाने पहुंचा लेकिन थानाध्यक्ष ने यह कहकर आवेदन लेने से इनकार कर दिया कि चुनाव के बाद आना। 

विधानसभा चुनाव के दौरान अंतिम चरण के चुनाव प्रचार में हरलाखी विधानसभा के गंगौर में भीड़ से किसी ने सीएम नीतीश की तरफ आलू-प्याज फेंका, यह घटना मीडिया की सुर्खियाँ बनीं। सभा के दौरान सीएम गुस्सा भी हुए, लेकीन सीएम ने मंच से ही भीड़ से आलू-प्याज फेंके जाने पर कौतुहल व सुरक्षाकर्मियों की चहलकदमी देख अज्ञात शख्स को छोड़ देने की बात कही। बावजूद पुलिस प्रशासन ने उक्त मामले में अज्ञात के खिलाफ FIR किया और तेजी से अनुसंधान कर मामले का आरोपी गंगौर गांव के राजनंदन यादव को बनाया। जो कि मजदूर है, जिसे हरलाखी पुलिस ने शुक्रवार को खेत में करते हुए गिरफ्तार भी कर लिया। हरलाखी थाना क्षेत्र में इतनी तेजी से किसी मामले में अनुसंधान व कार्रवाई बहुत कम ही देखने के लिए मिलता है। जबकि इस थाने में कई ऐसे मामले खुली किताब की तरह जनता के सामने हैं, जिनमें आरोपी से लेकर सबूत साक्ष्य सामने हैं बावजूद भी ना अनुसंधान होता है, ना कार्रवाई।

खैर यहां बेनीपट्टी अनुमंडल क्षेत्र के पुलिस प्रशासन के काम कारनामों को लिखने का आशय यही है कि, अगर आप बेनीपट्टी अनुमंडल क्षेत्र से हैं तो आप यह मान कर चलें कि अगर आपके गांव परिवार में कोई घटना-दुर्घटना होती है तो आपको खुद ही मामले का अनुसंधान करना है। गांव में चोर आया है तो उसे पकड़कर पुलिस को देना है। गाड़ी चोरी हुई तो उसे खुद ढूँढना है। आपको सरकार प्रशासन से लाख शिकायत हो, सड़क जाम नहीं करना है। फिर आपके द्वारा बताये गये समस्या पर पुलिस को जब फुर्सत मिलेगी वह पंहुचेगी और जब भी पंहुचेगी आप उन्हें अतिथि के तरह पाग माला देकर सम्मान करेंगे, बेनीपट्टी का प्रशासनिक सिस्टम आपसे यही उम्मीद करता है।

एक सप्ताह भी नहीं बीता है जब बेनीपट्टी थाना क्षेत्र के शिवनगर गांव में ग्रामीणों ने जान पर खेलकर बाइक चोर को पकड़ा। ग्रामीणों ने चोरों को पुलिस के हवाले कर दिया, जिसके बाद पुलिस की जांच और चोरों से पूछताछ में कई और बाइक चोरी होने के मामले सामने आये। लेकिन यह सफलता भी पुलिस की कम और ग्रामीणों की अधिक थी। जिसकी वजह बेनीपट्टी पुलिस का अनुभव भी है, जो कि चोर से अधिक शराब पकड़ने और वाहन चेकिंग का है।



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