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मिथिला की संस्कृति व संस्कार की रक्षा बहुत जरुरी : बौआ दाई

 


बेनीपट्टी(मधुबनी)।  मुख्यालय के कटैया रोड में स्थित श्री लीलाधर उच्च विद्यालय के मैदान में मिथिलांचल सर्वांगींण विकास संस्थान द्वारा आयोजित तीन दिवसीय 36 वां मिथिला विभूति स्मृति पर्व समारोह के दूसरे दिन भी भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दूसरे दिन के कार्यक्रम का उदघाटन मिथिला पेटिंग के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने को लेकर भारत सरकार द्वारा पद्मश्री तथा राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित बौआ दाई देवी, संस्था के अध्यक्ष अमरनाथ झा भोलन, रूद्रकांत पाठक, मिथिला रत्न सह प्रसिद्ध गायक कुंज बिहारी मिश्र, समाजसेवी नंद कुमार झा, डा. एमटी रेजा और डा. नवीन झा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष श्री भोलन ने किया। वही संचालन गायक रमेश रंजन ने किया। कार्यक्रम में सभी अतिथियों को मिथिला के परंपरा के अनुसार पाग दोपटा और माला से सम्मानित भी किया गया। वहीं कार्यक्रम में मिथिला और मैथिली के लिये विभिन्न क्षेत्रों में अपने प्रतिभा के बल पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले सात अतिथियों क्रमशः रूद्रकांत पाठक, सतीश चंद्र मिश्र, इंद्रकांत पाठक, अजीत आजाद, रमेश रंजन, उदय चंद्र तथा मिथिला रत्न कुंज बिहारी मिश्र को संस्था के द्वारा शिखर सम्मान से नवाजा गया। कार्यक्रम में उदघाटन भाषण करते हुए पद्मश्री और राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित बौआ दाई देवी ने कहा कि आज मिथिला हर क्षेत्र में आगे है। मगर हमें खुद की संस्कृति और सभ्यता तथा संस्कार का अनुपालन करते हुए कार्य करना है। यह धरती बाबा विद्यापति, महाकवि कालिदास, मां जानकी, मां उच्चैठ भगवती की है। हम मिथिलवासी को आत्मनिर्भर बनने की जरूरत है। मिथिला के लोगों को देश विदेश में धोती कुर्ता में देखतीं हूं तो मन गदगद हो जाता है। मैने भी अपनी संस्कृति अपने धरोहर को संरक्षित और आगे बढ़ाने के दिशा में काम की, इसलिये आज भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान दिया। इस सम्मान का कारण मिथिला और मिथिला पेटिंग तथा अपने धरोहर के प्रति किया गया तपस्या है। वहीं रूद्रकांत पाठक ने कहा कि बाबा विद्यापति हमारे आदर्श है। वें एक ऐसे कवि थे, जिनको सुनने के लिये भगवान शिव स्वयं उगना का रूप धर चाकरी करने पहुंचे थे। जबकि मिथिला रत्न कुंज बिहारी मिश्र ने अपनी संस्कृति और सभ्यता तथा मातृभाषा पर बल देते हुए कहा कि हम काफी भाग्यशाली है, जो हमारा जन्म इस मिथिला की पावन धरती पर हुआ है। हमें सभी को मिथिला और मैथिली के विकास के लिये एक जुट होकर कार्य करने की जरूरत है। कार्यक्रम को अतिथि सतीश चंद्र मिश्र, गायक रमेश रंजन, प्रो. भवानंद झा सहित अन्य ने भी संबोधित किया। 


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