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बेनीपट्टी के गम्हरिया में है एकमात्र अंकुरित सरस्वती की मूर्ति

बेनीपट्टी(मधुबनी)। सूबे में एकमात्र अंकुरित भगवती सरस्वती के मंदिर होने का दावा करने वाला बेनीपट्टी प्रखंड का गम्हरिया गांव अब तक पर्यटन विभाग की नजरों से दूर है। जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित गम्हरिया गांव में अंकुरित मां सरस्वती का स्थान है, माना जाता है कि गम्हरिया को छोड़ कर अन्य किसी भी स्थल पर माता सरस्वती की मूर्ति अब तक अंकुरित नहीं हुई है। काले रंग के दिव्य शिलाखंड पर ढ़ाई फीट की अंकुरित मां सरस्वती की मूर्ति है। बीते 69 वर्षों से अंकुरित सरस्वती माता की पूजा धूमधाम से मनाया जा रहा है, सरस्वती मंदिर में प्रत्येक दिन सुबह शाम पूजा, आरती एवं भव्य श्रृंगार किया जाता है। बसंत पंचमी के सरस्वती पूजा के दिन अंकुरित सरस्वती माता को विधि-विधान से 56 प्रकार का भोग लगाया जाता है। मंदिर के इतिहास के बारे में मंदिर के पुजारी शारदानंद मिश्र बताते है कि वर्ष 1948 में गम्हरिया गांव के डीह के निकट से मिट्टी खुदाई के दौरान अंकुरित सरस्वती माता की मूर्ति मिली थी। किवदंती है कि मूर्ति मिलने की भविष्यवाणी गांव में पहुंचे एक संत ने कई दिन पूर्व ही की थी। खुदाई होने के बाद ग्रामीणों ने माता सरस्वती की मूर्ति को विधि-विधान पूर्वक स्थापित कर पूजा-अर्चना शुरु कर दी। माना जा रहा है कि सरस्वती की कृपा से गांव जल्द ही विकसित गांव के रुप में प्रसिद्ध हो गया। ग्रामीणों ने अपने सामूहिक प्रयास से मूर्ति स्थल पर मंदिर का निर्माण कराया। अंकुरित सरस्वती को देखने एवं पूजा के लिए सालों भर दूसरे प्रांत एवं पड़ोसी मुल्क नेपाल से अधिक श्रद्धालु मंदिर पहुंच कर पूजा पाठ कर मनचाहा आशिर्वाद प्राप्त करते है। माना जाता है कि अब तक मंदिर से खाली हाथ कोई भक्त नहीं लौट सका है। माता सरस्वती सब पर अपनी कृपा बरसाती है। उधर बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा को लेकर गांव में उत्साह का माहौल है। गांव के युवा धूमधाम से पूजा के आयोजन की तैयारी कर रहे है। गांव में धूमधाम से पूजा के आयोजन को दूसरे प्रांत में नौकरी कर रहे स्थानीय लोग इस पूजा के अवसर पर अवश्य पहुंच मैया से आशिर्वाद प्राप्त करते है। ग्रामीणों ने बताया कि बिहार सरकार को इस मंदिर को पर्यटन स्थल के तौर पर मान्यता देकर विकास कार्यों के लिए राशि खर्च करना चाहिए। गौरतलब है कि गम्हरिया की अंकुरित सरस्वती की मंदिर के निर्माण के बावजूद स्थानीय स्तर पर इस मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण के लिए विशेष सहायता की आवश्यकता है।

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