बिहार में गांव की सरकार चुनने के लिए अक्टूबर-नवंबर में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होगा। मौजूदा मुखिया और सरपंच जैसे जनप्रतिनिधियों का कार्यकाल दिसंबर 2026 तक है। इसके पहले चुनाव संपन्न करना है। बिहार में पंचायत चुनाव उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कराने हैं ताकि सुरक्षा कर्मियों की उपलब्धता की परेशानी नहीं हो। इसे देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारी तैयारियों में जुटे हैं।
पंचायत चुनाव 2026 नौ चरण में कराने की तैयारी है। राज्य निर्वाचन आयोग की मानें तो इसकी वजह कम संख्या में EVM उपलब्ध होना है।
- निर्वाचन आयोग के पास 32 हजार EVM हैं। आयोग हर जिले को दो चरण के लिए EVM देगा।
- रोटेशन के आधार पर जिला EVM का प्रयोग करेगा। पहले चरण का EVM तीसरे चरण में इस्तेमाल होगा। दूसरे फेज वाले ईवीएम चौथे फेज में यूज होगा।
- ईवीएम में SDMM (सिक्योर डिटैचेबल मेमोरी मॉड्यूल) होता है। इसका मुख्य रोल चुनाव और मतदान से जुड़े सभी महत्वपूर्ण डेटा को सुरक्षित रखना है।
- आमतौर पर भारत निर्वाचन आयोग की मुख्य ईवीएम में कंट्रोल यूनिट (CU), बैलेट यूनिट (BU) और वीवीपैट (VVPAT) का इस्तेमाल होता है।
- राज्य निर्वाचन आयोगों द्वारा स्थानीय निकाय या पंचायत चुनावों के लिए उपयोग की जाने वाली विशेष मल्टी-पोस्ट ईवीएम (MPSV मॉडल) में एक अलग होने वाला मेमोरी मॉड्यूल लगाया जाता है। इसी में हर चरण की वोटिंग के बाद डेटा सुरक्षित रखा जाएगा।
2011 की जनगणना के आधार पर होंगे पंचायत चुनाव
पंचायत चुनाव 2011 की जनगणना के आधार पर कराया जाएगा। इस वक्त जनगणना के लिए काम चल रहा है। इसके आंकड़े आने में समय लगेगा। इसके चलते 15 साल पुरानी जनगणना के आधार पर चुनाव होंगे। वार्ड से लेकर जिला परिषद की सीटों का आरक्षण 2011 की आबादी के अनुसार तय किया जाएगा।
चुनाव की तैयारियों में जुलाई से तेजी दिखेगी। बिहार पंचायती राज अधिनियम के तहत पंचायतों का कार्यकाल पहली बैठक की तिथि से 5 वर्षों का होता है। पिछला चुनाव 11 चरणों में सितंबर से लास्ट नवंबर में कराया गया था।
अगस्त महीने के अंतिम सप्ताह में नोटिफिकेशन की तैयारी
राज्य निर्वाचन आयोग की मानें तो पंचायत चुनाव 2026 की अधिसूचना अगस्त महीने के अंतिम सप्ताह या सितंबर के पहले पखवाड़े तक जारी की जा सकती है। आयोग इसी टाइम फ्रेम के तहत तैयारी कर रहा है।
आरक्षण रोस्टर, जनसंख्या आंकड़ों और प्रपत्र-1 के ड्राफ्ट प्रकाशन पर दावा-आपत्ति दर्ज करने तथा फाइनल गजट नोटिफिकेशन के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने समय सीमा तय कर रखी है।
दावा-आपत्ति दर्ज करने की अंतिम तिथि 15 जून 2026 तक है। कोई भी व्यक्ति 15 जून तक जनसंख्या से जुड़े दावा और आपत्तियां दर्ज करा सकता है। इसके लिए आवेदन जमा करना होगा।
पंचायत परिसीमन (Delimitation), जनसंख्या के प्रकाशन और नए आरक्षण रोस्टर (प्रपत्र-1) में विसंगतियों को दूर किया जा रहा है।
सभी प्राप्त आपत्तियों और दावों की जांच और फास्ट निपटारे के बाद 21 जून 2026 को चुनाव से संबंधित फाइनल गजट का प्रकाशन कर दिया जाएगा।
इसके बाद पंचायत चुनाव की आधिकारिक तारीखों का ऐलान करने का रास्ता साफ हो जाएगा।
4 हजार से अधिक पंचायतों का बदल जाएगा आरक्षण
पंचायत चुनाव 2026 में आरक्षण रोस्टर बदल रहा है। ऐसे में 4 हजार से अधिक पंचायतों का आरक्षण बदल जाएगा। बिहार के 55 हजार से अधिक वार्ड में भी यह परिवर्तन देखने को मिलेगा। परिसीमन भी बदल जाएगा।
पंचायती राज विभाग की मानें तो बिहार में वर्तमान में 8053 ग्राम पंचायतें हैं। 2021 में इसकी संख्या 8387 थी। शहरीकरण और नगर निकायों के विस्तार के चलते इनकी संख्या घटकर 8053 रह गई है।
इन सभी पंचायतों को मिलाकर बिहार में लगभग 1.15 लाख वार्ड हैं। राज्य के सभी 38 जिलों में जिला परिषद कार्यरत हैं। ब्लॉक स्तर पर पंचायत समितियों की संख्या 533 है।
पंचायत चुनाव 2026 में आरक्षण रोस्टर के साथ परिसीमन बदला जाएगा। यह कुछ इस तरह से काम करेगा।
1. रोटेशन के अनुसार सीटों की अदला-बदली: रोटेशन का सीधा मतलब है कि जो सीटें पिछले चुनाव में किसी खास वर्ग (जैसे SC, ST, OBC या महिला) के लिए आरक्षित थीं, उनका आरक्षण अगले चुनाव में बदल दिया जाता है।
उदाहरण के लिए, यदि कोई सीट इस बार अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है तो अगले चुनाव में वह चक्र के अनुसार अत्यंत पिछड़ा वर्ग या सामान्य श्रेणी में जा सकती है।
यदि किसी प्रखंड में 10 पंचायत है तो यहां सीधे-सीधे पांच में आरक्षण लागू किए जाएंगे। इस तरह से पांच सीट का चक्र बदल जाएगा।
पंचायती राज नियम के अनुसार, हर दो चुनाव यानी 10 साल बाद आरक्षण चक्र पूरी तरह से बदल जाता है।
उदाहरण के लिए, यदि 2016 और 2021 के पंचायत चुनावों में एक ही आरक्षण रोस्टर था, तो अगले चक्र यानी 2026 के पंचायत चुनाव में नया आरक्षण रोस्टर लागू होगा। इससे पुरानी आरक्षित सीटें सामान्य और सामान्य सीटें आरक्षित हो जाती हैं।
2- जनसंख्या का आधार जनगणना डेटा: आरक्षण तय करने के लिए उपलब्ध नवीनतम आधिकारिक जनगणना (जैसे 2011 की जनगणना) को आधार बनाया जाता है।
SC और ST के लिए सीटें उस क्षेत्र जैसे ब्लॉक या जिला में उनकी आबादी के प्रतिशत के अनुपात में आरक्षित की जाती हैं। जिस गांव या वार्ड में SC-ST वर्ग के लोगों की आबादी ज्यादा होगी उसे पहले आरक्षित किया जाएगा।
3- महिला आरक्षण का रोटेशन: महिलाओं के लिए 50% सीटें आरक्षित हैं। महिलाओं के लिए रिजर्व सीटों का बदलाव भी रोटेशन से होता है। यदि इस बार किसी वार्ड या पंचायत में मुखिया का पद महिला सामान्य के लिए था तो अगले चक्र में वह पद पुरुष सामान्य या किसी अन्य श्रेणी की महिला के खाते में चला जाएगा।
मल्टी पोस्ट ईवीएम से पंचायत चुनाव होगा। इसमें इलेक्ट्रॉनिक चिप लगा होता है। प्रत्येक चरण की समाप्ति और मतगणना होने के बाद इलेक्ट्रॉनिक चिप को संबंधित जिले के डीएम के नियंत्रण में सुरक्षित रखा जाएगा।
मल्टी पोस्ट ईवीएम से पंचायत चुनाव होगा। इसमें इलेक्ट्रॉनिक चिप लगा होता है। प्रत्येक चरण की समाप्ति और मतगणना होने के बाद इलेक्ट्रॉनिक चिप को संबंधित जिले के डीएम के नियंत्रण में सुरक्षित रखा जाएगा।
बायोमेट्रिक सिस्टम से ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन तक, इस्तेमाल होंगी ये टेक्नोलॉजी
1. मल्टी-पोस्ट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन: पंचायत चुनाव की जटिलता को देखते हुए पहली बार पिछले चुनाव 2021 में ऐसी तकनीक का उपयोग किया गया था।
इस बार एक कंट्रोल यूनिट (CU) से छह बैलट यूनिट (BU) जोड़े जाएंगे। इसके जरिए मतदाता एक ही बूथ पर मुखिया, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य जैसे विभिन्न पदों के लिए अलग-अलग बटन दबाकर मतदान कर सकेंगे।
2. बायोमेट्रिक सिस्टम: फर्जी वोटिंग रोकने में सहायक होगा। मतदान केंद्र पर मतदाताओं के अंगूठे के निशान और आंख की पुतली को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड किया जाएगा।
यदि कोई व्यक्ति दुबारा या किसी दूसरे के नाम पर वोट देने पहुंचता है तो उसकी पहचान हो सकेगी।
3. ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (OCR) : वोटों की गिनती के समय हेरफेर या गड़बड़ी रोकने के लिए प्रत्येक काउंटिंग टेबल पर OCR तकनीक युक्त मशीनें लगाई जाएंगी।
यह ईवीएम स्क्रीन के नतीजों और डिजिटल डेटा को स्कैन करके चुनाव आयोग के सर्वर पर अपलोड करती है। इससे मतगणना तेज और सटीक होती है।
4. AI और JARVIS : मतगणना केंद्रों पर लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों को AI-संचालित वीडियो एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म 'JARVIS' से जोड़ा जाएगा। इससे काउंटिंग हॉल की हर गतिविधि और ईवीएम डिस्प्ले पर रीयल-टाइम नजर रखी जाएगी।
5. लाइव वेबकास्टिंग : बूथों की डिजिटल निगरानी की जाएगी। संवेदनशील और अति-संवेदनशील मतदान केंद्रों पर इंटरनेट के माध्यम से लाइव वेबकास्टिंग की व्यवस्था होगी।
इसके जरिए जिला मुख्यालय और राज्य निर्वाचन आयोग के कंट्रोल रूम में बैठे अधिकारी सीधे पोलिंग बूथ के अंदर चल रही प्रक्रियाओं को लाइव देख और मॉनिटर करते हैं।
6. डिजिटल पोर्टल और ऑनलाइन सुविधाएं: उम्मीदवारों के नामांकन , स्क्रूटनी की स्थिति, शपथ पत्र जांचने और मतदाताओं को अपने बूथ और वोटर लिस्ट की जानकारी ऑनलाइन प्राप्त करने के लिए विशेष डिजिटल पोर्टल और सॉफ्टवेयर का प्रयोग किया गया जाएगा।


