बेनीपट्टी(मधुबनी)। 4 नवंबर को देवोत्थान एकादशी के साथ ही शुभ कार्यों के मुहूर्त शुरू हो जाएगा। उसी दिन चतुर्मास भी समाप्त हो जाएगा। ज्योतिषाचार्य ने बताया चातुर्मास के समापन के साथ ही श्री हरि विष्णु योग निद्रा से जागृत होते हैं। श्रीहरि के जागृत होने के बाद से सभी प्रकार के मांगलिक कार्य शुरू हो जाता है। जिस कारण शादी विवाह का मुहूर्त भी इसी नवंबर माह में शुरू हो जाएगा। इस वर्ष देवोत्थान एकादशी के बावजूद लग्न कार्य 16 से 20 दिन विलंब से शुरू हो रहा है।

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इस संबंध में ज्योतिषाचार्य ने बताया शुक्र ग्रह उचित नहीं होने के कारण इस वर्ष देवोत्थान एकादशी के बावजूद लग्न का देर से शुरू हो रहा है। शादी विवाह के लिए बृहस्पति और शुक्र दो ग्रहों का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया मिथिला पंचांग से 20 नवंबर से शादी विवाह का लग्न शुरू हो रहा है। इसी तरह मिथिला पंचांग में नवंबर माह में 7 व दिसंबर माह में 6 लग्न है। 28 नवंबर को अगहन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी व 8 दिसंबर को अगहन मास की पूर्णिमा की विवाह के लिए अति श्रेष्ठ मुहूर्त है। उन्होंने बताया देवोत्थान एकादशी से मांगलिक कार्य शुरू होने के बाद से ही 16 दिसंबर को खरमास शुरू होने तक चलेंगे। 16 दिसंबर को शाम 6.53 बजे से खरमास लग रहा है। उसके बाद अगले साल मकर सक्रांति से साथ मांगलिक कार्य व शादी का मुहूर्त शुरू होंगे।

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मिथिला पंचांग के अनुसार नवंबर माह में 20 नवंबर, 21 नवंबर, 24 नवंबर, 25 नवंबर, 27 नवंबर, 28 नवंबर, 30 नवंबर व दिसंबर माह में 4 दिसंबर, 5 दिसंबर, 7 दिसंबर, 8 दिसंबर, 9 दिसंबर व 14 दिसंबर को शुभ मुहूर्त में शादी हो पाएगी।


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