मधुबनी। केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह ने मंगलवार को मधुबनी के अतिथिशाला के सभाकक्ष में जिलाधिकारी व अन्य अधिकारियों के साथ बैठक कर जिले में ग्रामीण विकास, पंचायती राज एवं भूमि संसाधन से संबंधित विषयों पर व्यापक समीक्षा की ।

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बताते चलें कि इस बैठक में जिला पदाधिकारी अमित कुमार द्वारा मंत्री को जिले में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग से संबंधित योजनाओं की प्रगति की जानकारी दी गई।

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बैठक के उपरांत  मंत्री श्री सिंह के द्वारा प्रेस वार्ता भी की गई जिसके दौरान उन्होंने जनसरोकार से जुड़े विभिन्न सरकारी योजनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के परिप्रेक्ष्य में ग्रामीण विकास मंत्रालय का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि चाहे प्रधानमंत्री आवास योजना हो, प्रधानमंत्री सड़क योजना हो, मनरेगा हो या फिर भूमि का डिजिटल रिकॉर्ड निर्माण करना हो। यह मंत्रालय भारत के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के क्षमता संवर्धन की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए मंत्री श्री सिंह ने आजीविका मिशन की भरपूर सराहना की और आगे भी जीविका समूहों के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आजीविका प्रदान करने तथा सशक्तिकरण करने में सक्रिय भूमिका निभाने की उम्मीद जताई। 

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से शहरों के विकास के लिए ब्लूप्रिंट तैयार कर योजनाओं के खाके बनाए जाते हैं, ठीक इसी प्रकार देश के सभी राज्यों के गावों के विकास के लिए पंचायतों के स्तर पर रोडमैप बनाकर विकास की दिशा तय की जाएगी। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2022-23 के ग्राम पंचायत द्वारा कार्य योजना तैयार करने( जेपीडीपी योजना )के तहत सतत विकास लक्ष्य के अंतर्गत चयनित लक्ष्यों में से किसी एक लक्ष्य को सभी पंचायतों को शामिल कर पूरा करने पर बल दिया।इसी क्रम में पंचायते अपने जीपीडीपी में स्वयं सहायता समूह द्वारा निर्मित village poverty reduction plans (VPRP)को भी शामिल करेंगी ताकि अपनी आवश्यकता के अनुरूप पंचायतें अपना लक्ष्य निर्धारित करें और उसे पूरा कर देश के निर्माण में सहयोगी बन सकें। उन्होंने प्रत्येक पंचायत में बीस से तीस प्रतिशत निजी जमीन पर वृक्षारोपण कार्य मनरेगा/ पंचायती राज विभाग से पूर्ण करवाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी पंचायत भवन को इंटरनेट सेवा से युक्त करने के निर्देश भी दिए। साथ ही साथ गावों के चहुमुखी विकास के लिए ग्राम सभाओं के नियमित आयोजन पर जोर दिया। ग्राम स्तर पर आयोजित सभा में युवाओं, सीनियर सिटीजन, क़ृषि, रोजगार एवं अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्र के लोगो को भी आमंत्रित करने पर जोड़ दिया। उनका कहना था कि विकसित गांव से देश विकसित हो सकेगा। उन्होंने गांवों के विकास में स्वयं सहायता समूहों के योगदान को भी रेखांकित किया।

मंत्री ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं को मिशन लखपति बनाने के उद्देश्य से उन्हें इस लायक बनाना होगा कि उनकी महीने की आमदनी कम से कम आठ से बारह हजार तक अवश्य हो जाए। 

उन्होंने डीपीओ, मनरेगा को पंचायत स्तर पर एक ऐसे व्हाट्सएप ग्रुप के निर्माण करने का निर्देश जिसमें त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधि एवं अन्य महत्वपूर्णक्षेत्रो के लोगो जोड़कर बने । ताकि पंचायतों में जारी विकासात्मक योजनाओं में पारदर्शिता लाई जा सके। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि, राजनेता और ब्यूरोक्रेट्स के समन्वय से पंचायतों के विकास को नई दिशा दी जा सकेगी।

उन्होंने विकास के कुछ नकारात्मक पहलुओं पर भी सभी का ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि हमारे देश में बड़ी आबादी को सुचारू आवागमन उपलब्ध कराने के लिए सड़कों की लंबी श्रृंखला बनाई गई है, जिसमें बड़ी मात्रा में पत्थरों का उपयोग होता है। इससे हमारे पहाड़ खप रहे हैं। ऐसे में उन्होंने देश के सभी राज्यों का आह्वान किया है कि वे अपने अपने जिलों में कम से कम पंद्रह प्रतिशत सड़कों का निर्माण अनुपयोगी प्लास्टिक जैसे कचरों से करवाएं, ताकि पहाड़ों का क्षय रोका जा सके।

उन्होंने प्रधान मंत्री आवास योजना एवं मनरेगा जैसे लोक कल्याणकारी योजनाओं में ठगी करने वालों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे लोगों पर केस दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लेबर मेट के अंतर्गत जीविका के स्वयं सहायता समूह को जोड़ने का निर्देश डीपीओ,मनरेगा को दिया।


उक्त समीक्षा बैठक के दौरान डीडीसी विशाल राज, जिला पंचायती राज सह सूचना एवं जनसंपर्क पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार, जीविका के जिला प्रबंधक ऋचा गार्गी, जिला कृषि पदाधिकारी के साथ साथ सभी संबंधित अधिकारी मौजूद थे।


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