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महिलाओं के लिए शिक्षा जननी बनी सावित्रीबाई फुले

 


बेनीपट्टी(मधुबनी)। बेनीपट्टी के अंबेडकर-कर्पूरी सामाजिक संस्थान के तत्वावधान में रविवार को माता सावित्री बाई फुले की 190 वीं जयंती मनाई गई। उपस्थित वक्ताओं ने सावित्री बाई फुले के कृतित्व की चर्चा कर उनके प्रयासों का जमकर बखान किया। इस अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसकी अध्यक्षता विजय पासवान ने किया। रामलखन राम ने कहा कि बहुजन समाज में जन्मे संत-महापुरुष, पत्रकार व साहित्यकार, जिन्होंने समता, स्वतंत्रता व भाईचारा के लिए संघर्ष किया। उनको आज याद करने का दिन है। वहीं श्री राम ने ऐसे महान सपूतों के शौर्य गायन कर उन्हें नमन किया। बिहार प्रभारी अधिवक्ता महेन्द्र नारायण राय ने कहा कि सावित्री बाई फुले महिलाओं का दिल दिमाग में सामाजिक कुरीतियों से लड़ने के लिए शिक्षा के प्रति जागरुक किया। समाज में व्याप्त अंधविश्वास को खत्म करने के लिए शिक्षा पर लोगों को जोर देने के प्रति काम की। संस्थापक रामवरण राम ने कहा कि ज्योतिवा फुले शिक्षित थे, मगर उनकी पत्नी सावित्री बाई फुले अशिक्षित थी। बावजूद, देश की प्रथम शिक्षिका बनी। जिन्होंने गरीब व खासकर महिलाओं के शिक्षा के लिए लगातार काम की। निःशुल्क शिक्षा को अभियान बना कर लोगों को शिक्षा से जोड़ा। पवन भारती व अन्य वक्ताओं ने सावित्री बाई फुले के द्वारा किए गये सामाजिक कार्यों का उल्लेख किया। इससे पूर्व वक्ताओं ने सावित्री बाई फुले के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया। मौके पर अजित यादव, नागेन्द्र यादव, अभिषेक पासवान, गोविंद यादव, सुधा देवी आदि मौजूद थे।



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