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प्रशिक्षण में एसडीएम ने कहा, विश्वकर्मा के रुप होते है राजमिस्त्री

बेनीपट्टी(मधुबनी)। भूकंप के सबसे अधिक खतरनाक जोन में मधुबनी जिला है। वैसे तो अन्य आपदाएं भी इस जिले को क्षति पहुंचाती है, लेकिन भूकंप से इस जिले को हमेशा अत्यधिक खतरा है। जापान में हमेशा भूकंप के झटके आते है। लेकिन, जापान की तैयारी इस तरह की है, जो भूकंप के आने के बाद भी जान-माल की अधिक क्षति नहीं होती है। बिहार सरकार व आपदा प्रबंधन विभाग का प्रयास है कि भूकंप से मधुबनी जिले को भी कम क्षति हो, इसके लिए हमें भी पूर्णरुप से प्रशिक्षित होकर तैयारी करनी होगी। एसडीएम मुकेश रंजन ने ये बातें शुक्रवार को प्रखंड के मेघदूतम के सभागार में आयोजित सात दिवसीय प्रशिक्षण को संबोधित करते हुए राजमिस्त्रियों को कहा। एसडीएम बिहार राज्य आपदा प्राधिकरण की और से भूकंप रोधी भवन निर्माण के लिए आयोजित प्रशिक्षण को संबोधित कर रहे थे। एसडीएम ने कहा कि राजमिस्त्री के बनाए गए भवन में ही आम आदमी से लेकर खास आदमी रहते है। उनके द्वारा दिए गए सुझाव पर ही भवन का निर्माण कराया जाता है। मधुबनी जिला आपदा के खतरनाक जोन में है। इसलिए, इस क्षेत्र में भवन का निर्माण भी भूकंपरोधी होना चाहिए, ताकि भूकंप आने पर व्यापक स्तर पर जान-माल की क्षति न हो। एसडीएम रंजन ने कहा कि राजमिस्त्री को भगवान विश्वकर्मा के रुप में देखा जाता है। इसलिए, आप लोग यहां रहकर भूकंपरोधी भवन का निर्माण कैसे होगा, इसकी पूर्ण प्रशिक्षण प्राप्त करें, प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद सात सौ रुपये के रोजाना के दर से आप लोगों को भुगतान किया जाएगा। ताकि, प्रशिक्षण के दौरान आपने परिवार पर किसी प्रकार का आर्थिंक संकट उत्पन्न न हो। वहीं अंचलाधिकारी पुरेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि किसी भी आपदा को रोक पाना संभव नहीं है, लेकिन, आपदा से होने वाले व्यापक क्षति को प्रशिक्षण व जागरुकता के माध्यम से कम किया जा सकता है। भूकंपरोधी भवन के निर्माण से क्षति को टाला जा सकता है। सीओ ने कहा कि अब समय बदल चुका है,पहले के जमाने में भवन का निर्माण हल्कें व दूर-दूर होता था, अब भवन का निर्माण दूसरे भवन के इतने समीप होता है कि भूकंप आने के बाद भागना भी मुश्किल है। ऐसे में प्रशिक्षण व भूकंपरोधी भवन के निर्माण से ही बचाव किया जा सकता है। वहीं प्रशिक्षण प्रभारी ई. सुमीत गोस्वामी ने बताया कि भूकंपरोधी भवन के निर्माण में अधिक लागत नहीं आती है। इसमें कुछ तकनीकी पहलूओं पर विशेष रुप से ध्यान देने की आवश्यकता होती है। किस तरह के बीम का निर्माण, बालू-सिमेंट के मात्रा पर विशेष ध्यान देने की जरुरत होती है। वहीं प्रशिक्षण प्रभारी ने बताया कि घर के निर्माण से पूर्व कम से कम छह घंटे तक ईंट का पानी में रखना चाहिए। प्रशिक्षण प्रभारी ने बताया कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से सभी तीस राजमिस्त्रियों को पीलर के निर्माण से लेकर भूकंपरोधी भवन के निर्माण से संबंधित पूरी जानकारी के साथ भवन का निर्माण कार्य कर प्रशिक्षित किया जाएगा। वहीं बताया गया कि प्रशिक्षण में आए राजमिस्त्रियों को रोजाना सात सौ रुपये के भुगतान के साथ भोजन, चाय व नाश्ते का भी प्रबंध किया गया है। मौके पर प्रशिक्षक संतोष कुमार व त्रिभुवन साह उपस्थित थे।

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