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विकास से कोसों दूर परसौना का मधवापट्टी गांव, पगडंडी से आवाजाही करते है ग्रामीण

बेनीपट्टी (मधुबनी)। आजादी के कई दशक गुजर जाने के बाद भी सुदूर ग्रामीण इलाकों की तस्वीर नहीं बदल पायी है। जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा तो कभी प्रशासनिक उदासीनता के कारण गांवों की सही तस्वीर सामने नहीं आ पायी है। जिसका खामियाजा सुदूर ग्रामीण इलाकों के लोगों को आज भी उठाना पड़ रहा है। प्रखंड के परसौना पंचायत के मधवापट्टी, इन्ही उपेक्षाओं का शिकार होकर अथाह समस्याओं के भंवर में फंसा हुआ है। जबकि मधवापट्टी गांव के आसपास का इलाका मूलभूत सुविधाओं से लबरेज है। आज के विकासशील युग में भी मधवापट्टी गांव में ग्रामीण सड़क के अभाव के कारण ग्रामीणों को मुख्य सड़क तक आने के लिए पगडंडी का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं मुख्य सड़क पर आने के बाद भी ग्रामीणों को बेहतर पथ के बजाय अतिजर्जरता का शिकार हो चुके बेनीपट्टी-बरहा पथ बेदम कर देता है। गौरतलब है कि बेनीपट्टी का ये गांव मधवापट्टी बरहा-ईटहर पथ के सेरहा पाकड़ चौक से पूर्व-दक्षिण की ओर अवस्थित है। गांव में अल्पसंख्यकों की अधिकांश आबादी है। जहां के ग्रामीण आज भी हर छोटी-बड़ी कार्यों के लिए बेनीपट्टी ही आते है। गांव में घनी आबादी होने के बाद भी सरकार की अधिक योजना इस गांव में दहलीज तक नहीं पहुंच पायी है। नली-गली योजना लागू होने के बाद भी ग्रामीणों को पीसीसी सड़क तो दूर दुरुस्त खरंजायुक्त सड़क भी नसीब नहीं हो पाया है। वहीं गांव में मदरसा के साथ सरकारी प्राईमरी स्कूल भी संचालित है। बावजूद मुहल्लें में शिक्षा की लौ नहीं जल पा रही है। सूत्रों की माने तो सरकारी प्राईमरी स्कूल में सही ढंग से शिक्षा भी नहीं दी जा रही है। जिसके कारण स्थिति खराब है। वहीं गांव मेंं स्वास्थ्य की सुविधा भी लोगों को मयस्सर नहीं हो रहा है। गांव में युवकों ने बताया कि कई बार मूलभूत सुविधाओं के लिए आन्दोलन किया , लेकिन आज तक गांव में सही ढंग से विकास कार्य नहीं हो पाया। इस संबंध में पूछे जाने पर प्रखंड विकास पदाधिकारी डा. अभय कुमार ने बताया कि गांव के विकास के लिए उनका प्रयास हमेशा हो रहा है। मधवापट्टी की समस्या से वाकिफ है, जल्द ही उक्त गांव को भी हर सुविधा से लैस करने का कार्य किया जाएगा।

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