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20 हजार लोगों को मिलेगा लाभ, कचरी चौक पर निर्माण होगा पुल

बेनीपट्टी (मधुबनी)। साल-1987 के प्रलयकारी बाढ़ में ध्वस्त हो चुके कचरी चौक पर कटाव स्थल पर आखिरकार 30 वर्ष गुजर जाने के बाद पूल निर्माण की हरी झंडी मिल गयी है। ग्रामीण कार्य विभाग, बेनीपट्टी एक बार फिर उक्त कटाव स्थल पर पूल निर्माण को लेकर निविदा की प्रक्रिया में गयी है। संभावना है कि उक्त पूल निर्माण की निविदा की प्रक्रिया जल्द ही पूरी होगी। जिसके बाद विभाग के देखरेख में पूल का निर्माण कराया जाएगा। जिसको लेकर काफी माथापच्ची हो रही थी। विभागीय सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार उक्त कटाव स्थल पर करीब 81 लाख से अधिक की राशि से लागत पूल का निर्माण कराया जाएगा। गौरतलब है कि तीस वर्ष पूर्व आये बाढ़ में कचरी चौक के निकट सड़क को जलप्रवाह की तेज धाराओं ने काट दिया था। जिसके बाद उक्त स्थल पर मिट्टीकरण एवं अन्य तरह के प्रयास कर कटाव स्थल को पाटने का प्रयास किया गया। परंतु हर प्रयास चंद दिनों के लिए ही ठहर पा रही थी। ग्रामीणों ने उक्त स्थल पर पूल निर्माण की मांग को लेकर वर्षों तक विभिन्न चरणों में आन्दोलन किया। लेकिन हर आन्दोलन का प्रभाव सिर्फ आश्वासन तक ही सिमटा हुआ था। स्थानीय विधायक भावना झा ने चुनाव निर्वाचित होने के बाद उक्त स्थल पर हर हाल में पूल निर्माण कराने की बात करते हुए सदन में सरकार के समक्ष सवाल उठाने का काम किया। विधायक श्रीमती झा ने बताया कि सदन में सवाल करने के बाद पूल निर्माण को लेकर विभाग सजग हुई। विधायक बताती है कि गत दिन उनके प्रयास से पूल की निविदा निकाली गयी। लेकिन समय पर निविदा की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी। उधर, विधायक ने बताया कि विभाग के साथ समनव्य बनाते हुए एक बार फिर कचरी चौक पर पूल निर्माण कराने के लिए निविदा की प्रक्रिया में भेजी गयी है। जो जल्द ही पूरी कर निर्माण की प्रक्रिया शुरु की जाएगी। उधर, ब्रह्मपुरा पंचायत के मुखिया अजित पासवान ने बताया कि कचरी चौक पर पूल निर्माण के लिए वे कई वर्षों से आन्दोलन कर रहे है। श्री पासवान ने सीएम के साथ विभागीय मंत्री व स्थानीय प्रशासन की भूमिका को सराहनीय बताते हुए साधुवाद दिया है। सनद रहे कि उक्त स्थल पर पूल निर्माण नहीं होने से करीब आधा दर्जन गांव के 20 हजार लोगों को आवाजाही के लिए भारी संकट के बीच गुजरना पड़ता है। बारिश के मौसम में कटाव स्थल में पानी का जमाव होने से आवागमन पूर्णरुप से बंद हो जाती है। बारिश में उक्त क्षेत्र के लोग पथ न0-420 होकर आवाजाही करने के लिए मजबूर हो जाते है। 

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