वर्षो से मिट्टी के लिए तरस रहा चानपुरा का रिंग बांध - BNN News

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22 Jun 2020

वर्षो से मिट्टी के लिए तरस रहा चानपुरा का रिंग बांध

बेनीपट्टी(मधुबनी)। जल संसाधान विभाग के दोहरे मापदंड के कारण बसैठ-चानपुरा के लोग खासे परेशान है। करोड़ों की राशि से एक ओर जहां जमींदारी बांध की मरम्मती कराई गई है। लेकिन, बसैठ-चानपुरा के लिए लाईफ लाईन रिंग बांध की मरम्मती तो दूर बांध पर एक टोकरी मिट्टी भी नहीं डाली गई है। वर्षों से आए प्रलयकारी बाढ़ में रिंग बांध को भारी पैमाने पर क्षति हुई है। वहीं बांध पर महीनों तक बाढ़ पीड़ितों के शरण लिए जाने के कारण बांध कई जगहों पर कटाव की स्थिति में आ गया है। बता दें कि बसैठ का चानपुरा गांव चारों ओर से नदी व नालों से घिरा हुआ है। चानपुरा के पूरब में सोईली धार की धौंस नदी, पश्चिमी भाग में खिरोई नदी, उत्तर में कोकराहा धार तथा दक्षिणी भाग में भुड़का नाला अवस्थित है। पड़ोसी देश नेपाल में भारी बारिश होने से प्रति वर्ष इस सभी नदी-नालों का पानी भयावह स्थिति में आ जाती है। जिसके कारण बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। नदी-नालों से घिरे होने के कारण चानपुरा गांव के पांच हजार लोगों को जान के लाले पड़ जाते है। जान बचाना मुश्किल हो जाता है। इस समस्या को देखते हुए वर्षों पूर्व चानपुरा गांव के सुरक्षा के लिए रिंग बांध का निर्माण कराया गया। रिंग बांध के निर्माण के समय जल संसाधन विभाग के अभियंताओं ने नदी के साथ सभी कोणों पर चार स्लूइस गेट का निर्माण कराने का प्रस्ताव दिया था, ताकि गांव के लोग पानी से सुरक्षित रहे, रिंग बांध के निर्माण के समय दो स्लूईस गेट का निर्माण नदी में कराया गया। लेकिन, बांध के मध्य स्लूईस गेट का निर्माण नहीं कराने से बाढ़ के समय स्थिति अत्यंत ही कष्टकारी हो जाती है। प्रखंड के उप प्रमुख अशोक कुमार चौधरी ने बताया कि ये बड़ी दुर्भाग्य की बात है कि कई बार विभाग को लिखे जाने के बाद भी गत पंद्रह वर्ष से बांध पर मिट्टी नहीं डाली गई है। श्री चौधरी के अनुसार रिंग बांध की स्थिति काफी खराब हो गई है। रेनकट व चूहों के कारण बांध भारी पैमाने पर क्षतिग्रस्त हो चुका है। वहीं भाजपा के युवा नेता भास्कर चौधरी ने बताया कि गत बाढ़ में उच्च विद्यालय के समीप बांध अगर नहीं टूटती तो चानपुरा गांव खत्म हो जाता। श्री चौधरी ने कहा कि पानी के अत्यधिक दवाब वाले स्थलों पर विभाग को अविलंब स्लूईस गेट का निर्माण कराना चाहिए। बांध की क्षतिग्रस्त भागों को मजबूती के लिए मिट्टी डाल देना चाहिए।

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