आजादी के 71 वर्ष बाद भी ब्रिटिश शासन में निर्मित लकड़ी पुल से हो रही आवाजाही - BNN News

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7 Sep 2018

आजादी के 71 वर्ष बाद भी ब्रिटिश शासन में निर्मित लकड़ी पुल से हो रही आवाजाही

बेनीपट्टी(मधुबनी)। आजादी के 71वें वर्ष होने के बाद भी कई सुदूर ग्रामीण इलाकों की सूरत नहीं बदल पायी है। रामजानकी पथ के नाम से मशहूर साहर उतरी पंचायत के अखरहरघाट गांव से दक्षिण का जिला परिषद की सड़क पर ब्रिटिश शासन कालीन लकड़ी पुल की स्थिति बद्तर होने के बाद भी स्थिति यथावत है। जबकि बिहार व केन्द्र सरकार ग्रामीण इलाकों की सूरत बदलने के लगातार दावे कर रही है। अखरहरघाट गांव टापू की तरह तीन दिशा में नदियों से घिरा है। भारत -नेपाल सीमा के समीप धौस, यमुनी एवं सिमरा नदी के पवित्र संगम तट पर बसा पंचायत के वार्ड संख्या एक वाला अखरहरघाट गांव में हर वर्ष दवात पूजा व भाई दूज पर्व पर विशाल मेला लगता है। इसके अलावे विभिन्न अवसरों पर इलाके के धर्मावलंबी यहां संगम तट पर डुबकी लगाने आते हैं और बाबा के मंदिर में जल अर्पित कर पुण्य के भागी बनते हैं। इसी तट पर राजकीय प्राथमिक विद्यालय भी है, जहां गांव के बच्चे हर दिन पढ़ने आते हैं और छठी से बारहवीं तक की शिक्षा पाने के लिए अन्यत्र इसी रास्ते से गांव के छात्र -छात्रा जाते आते हैं। इसी तरह लोग साहरघाट या अन्य जगह आवश्यक वस्तुओं की खरीददारी भी इसी रास्ते जाते हैं। इसी टूटे लकड़ी पुल को पारकर एसएसबी के जवान तीन शिफ्टों में 24 घंटे की ड्यूटी सीमा पर बजाने के लिए हर दिन जाते आते हैं तो प्रखंड के 10 पंचायत की हजारों जनता बाढ़ व सुखाड़ में इसी सड़क से प्रखंड मुख्यालय जाते -आते हैं। साथ ही मिथिलांचल की प्रसिद्ध धार्मिक नगरी जगत जननी मां सीता की धरती नेपाल के जनकपुर धाम, फुलहर गिरिजस्थान, मनोकामना नाथ तथा देश के एकावन शक्ति पीठों में सुमार उच्चैठ भगवती स्थान मत्था टेकने जाने -आने वाले श्रद्धालुओं के लिए कम दूरी का यह प्रसिद्ध व सुलभ मार्ग है। जिसे दोनों देश के सीमावर्ती क्षेत्र के लोग रामजानकी पथ के नाम से जानते हैं। सुखाड़ के दिनों में तो लोग किसी तरह पुल के नीचे से भी आते जाते हैं। लेकिन, बरसात के दिनों में ग्रामीणों, स्कूली बच्चों, शिक्षकों, सीमा पर तैनात एसएसबी जवानों और राहगीरों को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। सबसे बड़ी कठिनाई उन लोगों को होती है जो पक्के का गृह निर्माण करना चाहते हैं। यहां के लोग बैसाख के मौसम में ईंट, सीमेंट, बालू, छड़ सहित अन्य निर्माण सामग्री खेत के रास्ते मंगा लिया तो ठीक अन्यथा अन्य मौसम में घर बनाने के सपने धरे के धरे रह जाते हैं। कई लोग संसाधन रहते हुए पक्के का घर नहीं बना पा रहे हैं। यही हाल यहां के विद्यालय भवन निर्माण का है। पिछले पांच वर्षों से समय पर मेटेरियल नहीं पहुंच पाने के कारण यह स्कूल भवन निर्माणाधीन बना हुआ है। जबकि, यह सड़क व पुल दशकों से विभिन्न समाचार पत्रों की सुर्खियां बनती रही है। इलाके के लोग जान जोखिम में डालकर इस रास्ते सफर करने व जलालत भरी जिंदगी जीने को विवश हैं। लेकिन, विभिन्न स्तर के प्रशासनिक अधिकारी व जनप्रतिनिधि इस सड़क व पुल निर्माण को लेकर मूक दर्शक बने हुए हैं। पंचायत के मुखिया रामनरेश प्रसाद, वार्ड सदस्य रामकुमारी देवी एवं पैक्स अध्यक्ष किशोरी महतो कहते हैं कि हमारे पास इतनी राशि और अधिकार कहां कि पुल का निर्माण किया जाय। एसडीएम मुकेश रंजन ने बताया कि मेरे संज्ञान में ये बातें नहीं आयी है। जल्द ही इस सड़क का मुआयना कर जिला पदाधिकारी व संबंधित विभाग को सड़क एवं पुल निर्माण के लिए लिखा जाएगा।

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