BPSC द्वारा आगामी होने वाले TRE-4 में मैथिली विषय को शामिल न करना मिथिलावासियों के लिए निराशाजनक है। सरकार पुनः विचार कर टीआरई-4 के विज्ञापन में मैथिली विषय को हर हाल में शामिल कर मिथिलावासियों की नाराजगी को दूर करने का कार्य करे। उक्त बातें बुधवार को बयान जारी करते हुए पूर्व एमएलसी प्रो. दिलीप कुमार चौधरी ने कही।
प्रो. चौधरी ने कहा कि शिक्षा विभाग के कर्मियों और पदाधिकारियों के द्वारा मैथिली विषय के पदों के निर्धारण में की गई त्रुटि के कारण आज मैथिली और उर्दू शिक्षकों के सृजित पद काफी कम हो गया है। सरकार संबंधित जिलों के पदाधिकारियों को पुनः पोर्टल को खोलकर वैकल्पिक विषय में छात्र हित में उर्दू, मैथिली और संस्कृत के विषयों में सामंजस्य स्थापित करने का कार्य करे, ताकि छात्रों को शिक्षक मिल सके और गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन हो सके।
साथ ही उन्होंने कहा कि जहां गृह विज्ञान, गणित, भौतिकी, रसायनशास्त्र, जंतु और वनस्पति विज्ञान मिला के एक ही शिक्षक पदस्थापित हैं, उन्हें सरप्लस करने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग बिहार सरकार के द्वारा उच्च माध्यमिक विद्यालय में शिक्षक मानक मंडल का निर्धारण किया गया है, जिसमें छात्र-शिक्षक का समानुपातीकरण करना सरकार का उद्देश्य है।
आमतौर पर वैकल्पिक भाषा के विषयों के तौर पर छात्रों के द्वारा समस्त बिहार में तीन प्रमुख भाषा का चयन किया जाता है, जिसमें संस्कृत, उर्दू और मैथिली शामिल हैं। यह प्रक्रिया मैट्रिक और इंटर दोनों स्तर पर होती रही है। विभाग के द्वारा शिक्षक मानक मंडल निर्धारण में जहां पर जो छात्रों की संख्या जिस विषय में अपेक्षित है, अपेक्षित विषयों के शिक्षकों की पदस्थापना करने का प्रावधान है।
मिथिला क्षेत्र में अधिकांश छात्रों के द्वारा मैथिली विषय का चयन किया जाता है। परंतु पद निर्धारण में खासकर मधुबनी एवं दरभंगा जिलों में स्थानीय स्तर पर मैथिली विषय के छात्रों के अनुपात में शिक्षक पद का निर्धारण नहीं किया गया है, जिसके फलस्वरूप पूर्व से जो भी शिक्षक मैथिली विषय में कार्यरत हैं, वे भी अधिशेष की श्रेणी में हो गए हैं। साथ ही टीआरई-4 में दोनों स्तर पर माध्यमिक और उच्च माध्यमिक में मैथिली विषय की रिक्ति शून्य हो गई है।
वैकल्पिक भाषा में जहां उर्दू के छात्र हैं वहां उर्दू और जहां पर मैथिली के छात्र हैं वहां पर मैथिली शिक्षक पदस्थापित करना था। परंतु मधुबनी जिले में यह पद संस्कृत विषय को निर्धारित किया गया है, जिसके कारण मैथिली विषय के पद का अपेक्षित निर्धारण नहीं हो सका है। इससे छात्र-शिक्षक परेशान हैं।
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