मधुबनी। जिला मुख्यालय स्थित मंडल कारा रामपट्टी में जिला यक्ष्मा केंद्र की ओर से एचआईवी , टीबी जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 200 से अधिक लोगों का जांच किया गया. कार्यक्रम के दौरान जेल के वार्ड इंचार्ज और कैदियों को टीबी से बचाव और सावधानी के बारे में जागरूक किया गया। आईसीकम डीआईएस सचिन कुमार पासवान  ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय-समय पर  विशेष अभियान चलाकर लोगों को एचआईवी संक्रमण के प्रति जागरूक किया जाता है। जिसके तहत ईट भट्ठा में कार्यरत कार्मिकों, दूरदराज क्षेत्र में रह रहे मजदूर , उच्च जोखिम व्यवहार वाले समूहों, दूरस्त मार्गों के वाहन चालकों और मलिन बस्तियों में जांच व परामर्श व जाँच किया जाता है । इसी क्रम में आज जेल में बंद कैदियों को एड्स तथा टीबी के प्रति जागरूक किया गया।

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लक्षण महसूस होने पर तुरंत जांच कराएं-

स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा जेल के कैदियों के लिए समय-समय पर टीबी एवं एचआईवी से बचाव और उपचार के बारे में जागरूक किया जाता है। उन्होंने कहा कि टीबी खतरनाक बीमारी है। यक्ष्मा हमारे फेफड़ों को सबसे अधिक प्रभावित करता है। खांसी इसकी शुरुआती लक्षणों में से एक है। टीबी का लक्षण महसूस होने पर तुरंत जांच कराएं। चिकित्सक के सलाह के अनुसार, नियमित दवा के सेवन से इस रोग से मुक्ति मिलती है।  एचआईवी संक्रमित व्यक्ति में रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी होती है। इसके कारण एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों को टीबी (यक्ष्मा) बीमारी होने की संभावना अधिक होती है। ऐसे व्यक्ति का टीबी जांच करवाना भी अनिवार्य है। एचआईवी से शरीर का रोग निरोधक तंत्र कमज़ोर हो जाता है।  यह अन्य संक्रामक रोगों के लिए रास्ता खोल देता है।  इसलिए यदि मरीज को एचआईवी व निष्क्रिय टीबी है, तो सक्रिय टीबी होने की अधिक संभावना है। यदि इन दोनों संक्रामक रोगों का इलाज नहीं किया जाता तो ये मिल कर अन्य गम्भीर बीमारियाँ पैदा कर सकते हैं।

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एचआईवी पॉजिटिव लोगों में टीबी होने का खतरा अधिक :


बताया एचआईवी पॉजिटिव लोगों में टीबी होने का खतरा 16 से 27% ज्यादा होता है।  साथ ही ऐसे रोगियों में टीबी से मृत्यु का खतरा भी ज्यादा होता है।  ऐसे रोगियों को टीबी की दवा के साथ-साथ एआरटी ( एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी) एवं दवा भी नियमित रूप से खाने की आवश्यकता होती है।  हर टीबी रोगी को एचआईवी जांच कराना आवश्यक होता है ।  यदि वह पॉजिटिव पाए जाते हैं तो तत्काल एआरसी सेंटर रेफर करना चाहिए। एचआईवी पॉजिटिव लोगों में एकीकृत परामर्श, जांच केंद्रों एवं एआरटी सेंटर पर लगातार टीबी के लक्षण की जांच की जाती है। टीबी एवं एचआईवी की दवाइयां समस्त सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में  निःशुल्क उपलब्ध है। 


एचआईवी संक्रमित से ना करें भेदभाव :


एचआईवी से संबंधित एआरटी केंद्र में सभी प्रकार की सुविधा मरीजों को दी जा रही है। एचआईवी पीड़ित लोगों के साथ छुआछूत एवं भेदभाव नहीं  रखना चाहिए । वे अन्य सामान्य लोगों की तरह अपनी योग्यता अनुसार कहीं भी काम कर सकते हैं। सरकारी या प्राइवेट नौकरी पा सकते हैं । पहले से कार्यरत किसी को भी एचआईवी हो जाता है तो उन्हें कार्य से निकाला नहीं जा सकता। उन्हें अन्य लोगों की तरह पूर्ण अधिकार प्राप्त है। एचआईवी व एड्स के प्रति सुरक्षा एवं सावधानी की जरूरत है। इस तरह के मरीज को समुचित उपचार के बारे में समझाना है। ताकि उसे सही उपचार किया जा सके।

मौके परमौके पर जेलर अख्तर हुसैन, एसटीएलएस  भूवन नारायण कंठ , परामर्शी अंजू कुमारी,मोहम्मद अमरुद्दीन अंसारी, ओम प्रकाश सिंह एलटी, नयन कुमार,अमित कुमार मंडल कारा फार्मासिस्ट  , डॉ. मो. तरवेग करीम आदि उपस्थित थे।.


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