मधुबनी।
सदर अस्पताल का प्रसव कक्ष व मातृत्व ओटी के लक्ष्य प्रमाणीकरण की कवायद शुरू कर दी गई है. जिस क्रम में शुक्रवार को राज्य स्तरीय टीम ने सदर अस्पताल के प्रसव कक्ष का मूल्यांकन किया जिसके तहत सदर अस्पताल  की गुणवत्ता की मैपिंग की गई । जिसमें कुल आठ तरह के मूल्यांकन पैमाने बनाए थे। इसमें अस्पताल की आधारिक संरचना के साथ अस्पताल में साफ़-सफाई का स्तर, स्टाफ की उपलब्धता, लेबर रूम के अंदर जरुरी संसाधनों की उपलब्धता  मैपिंग की गयी है। साथ ही प्रसव कक्ष में सभी 36 प्रकार के रजिस्टर के अपडेशन की जानकारी ली टीम में  राज्य स्तर से डॉ महेंद्र बहेरा व डॉ विकास आर पांडे एवं क्षेत्रीय कार्यक्रम प्रबंधक नजमुल होदा शामिल रहे।

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सुविधाओं की ब्रांडिंग के लिए किया जाता हैं मूल्यांकन:


विदित हो कि हर 3 साल पर लक्ष्य प्रमाणीकरण किया जाता है. जिसके तहत वर्ष 2020 में भी सदर अस्पताल के प्रसव गृह तथा मैटरनिटी ऑपरेशन थियेटर का लक्ष्य प्रमाणीकरण किया गया था. जिसमें सदर अस्पताल का प्रसव गृह लक्ष्य प्रमाणित हो गया था, जबकि ओटी लक्ष्य प्रमाणीकरण नहीं हो पाया था. वहीं इस वर्ष लक्ष्य प्रमाणीकरण को लेकर प्रसव कक्ष में बेहतर व्यवस्था की गई थी जिसमें साफ सफाई, से लेकर हर पैमाने पर विशेष व्यवस्था की गई थी.


अब केंद्रीय टीम करेगी जांच:


आरपीएम नजमुल होदा  ने बताया लक्ष्य प्रमाणीकरण के लिए तीन स्तर पर जांच की जाती है जिस्म प्रथम स्तर पर प्रमंडल स्तर पर तथा दूसरे स्तर पर राज्य स्तरीय टीम के द्वारा एवं तीसरे चरण में केंद्रीय टीम के द्वारा मूल्यांकन किया जाता है. आज राज्य स्तरीय टीम के द्वारा मूल्यांकन किया जा रहा है राज्य स्तरीय टीम जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी अगर राज्य स्तरीय टीम संतुष्ट हो जाती है तो केंद्रीय टीम सदर अस्पताल के प्रसव कक्ष का निरीक्षण कर क्वालिटी की जांच करेगी अगर रैंकिंग में 70% लक्ष्य प्राप्त होता है तो सदर अस्पताल को 3 लाख का इनाम दिया जाएगा 70% उपलब्धि पर सांत्वना पुरस्कार दिए जाने का प्रावधान बनाया गया है सांत्वना पुरस्कार के रुप में सदर अस्पताल को तीन लाख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र व अनुमंडलीय  अस्पतालों को एक लाख एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को 50 हजार दिए जाने का प्रावधान है।

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भौतिक निरीक्षण कर 8 इंडीकेटरों की होती हैं जांच:


लक्ष्य योजना के तहत केयर इंडिया के डीटीएल महेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि लक्ष्य प्रमाणीकरण के 8 मानकों जिसमें मुख्य रूप से सेवा प्रावधान, रोगी का अधिकार, इनयूट्रस, सपोर्ट सर्विसेज, क्लिनिकल सर्विसेज, इंफेक्शन कंट्रोल, क्वालिटी मैनेजमेंट, आउटकम शामिल है. इन सभी आठों इंडीकेटरों का कुल 362 उपमानकों  पर अस्पताल के प्रसव कक्ष एवं शल्य कक्ष का लगभग 6 से 9 महीनों तक लगातार क्वालिटी सर्किल (संस्थान स्तर पर), ज़िला कोचिंग दल (ज़िला स्तर पर) इसके अलावा क्षेत्रीय कोचिंग दल द्वारा लगातार पर्यवेक्षण एवं निरीक्षण कर आवश्यकता अनुसार सभी स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया जाता है. प्रशिक्षण के बाद अस्पताल का भौतिक निरीक्षण किया जाता है, और यह देखा जाता हैं कि प्रशिक्षण लेने के बाद स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा कार्य किया जा रहा है या नहीं. इसके साथ ही आठों इंडीकेटरों इंडिकेटर्स के अनुरुप नियमानुसार समुचित ढंग से रखा जाता है या नहीं, इससे संबंधित निरीक्षण किया जाता है.


सुविधाओं की ब्रांडिंग के लिए किया जाता है मूल्यांकन:


प्रभारी अस्पताल अधीक्षक डॉ डी.एस मिश्रा ने कहा कि प्रसव कक्ष में देखभाल सुविधाओं का मूल्यांकन के बाद प्रसूति कक्ष और मैटरनिटी ऑपरेशन थियेटर में गुणवत्ता सुधार का मूल्यांकन राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्यूएएस) के माध्यम से किया जाता है. उसके बाद ही एनक्यूएएस पर 70% अंक प्राप्त करने वाली प्रत्येक सुविधाओं को लक्ष्य प्रमाणित सुविधा के रूप में प्रमाणित किया जाता है. इसके अलावा एनक्यूएएस स्कोर के अनुसार लक्ष्य प्रमाणित सुविधाओं की ब्रांडिंग की जाती है. 70 से 80 तक स्कोर पाने वाले अस्पताल को सिल्वर की श्रेणी में रखा जाता है. जबकि 81 से 90 तक स्कोर पाने वाले अस्पताल को गोल्ड की श्रेणी में रखा जाता है. वहीं 91 से 100 तक स्कोर पाने वाले अस्पताल को प्लेटिनम की श्रेणी में रखा जाता है. इन सभी को श्रेणियों में को प्रशस्ति पत्र व प्रोत्साहन के रूप में नकद राशि प्रदान की जाती है दिया जाता हैं।


लक्ष्य योजना के तहत पहले भी हो चुकी है ग्रेडिंग: 

अस्पताल प्रबंधक अब्दुल मजीद ने कहा कि सदर अस्पताल के लेबर रूम को लक्ष्य योजना के तहत वर्ष 2020 में प्रमाणित किया जा चुका है. लक्ष्य कार्यक्रम के तहत तीन स्तर पर रैंकिंग की जाती है. जिसमें पहले स्तर पर जिला, दूसरे स्तर पर क्षेत्रीय (रीजनल) एवं तीसरे स्तर पर राष्ट्रीय रैंकिंग की जाती है. । प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने के लिए अस्पताल को 75 अंक प्राप्त करना होता है.


इन मानकों पर तय किया जाता है हैं पुरस्कार:


अस्पताल की आधारभूत संरचना.

साफ-सफाई एवं स्वच्छता.

जैविक कचरा निस्तारण.

संक्रमण रोकथाम.

अस्पताल की अन्य सहायक प्रणाली.

स्वच्छता एवं साफ़-सफाई को बढ़ावा देना.


इस अवसर पर आरपीएम, प्रभारी अधीक्षक, अस्पताल प्रबंधक अब्दुल मजीद,प्रसव कक्ष इंचार्ज माधुरी कुमारी, केयर इंडिया के डीपीओ धीरज कुमार, डॉ राहुल रंजन डीटीओएफ, ज्योति डागर, सुरभि कुमारी, लेखापाल मनीष कुमार, मुन्ना   सहित अन्य कर्मी उपस्थित रहे।


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