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मंदिरों को तीर्थ स्थल घोषित करने से होगा विकास : विनोद

 


बेनीपट्टी(मधुबनी)। मिथिला क्षेत्र का विकास सिर्फ सड़क व पुल के निर्माण से नहीं होगा, सड़क व पुल-पुलियों का निर्माण निरंतर होने की योजना हो सकती है। इस क्षेत्र का विकास रोजगारपरक योजनाओं से होगा। जिसके लिए जनप्रतिनिधियों को आगे आकर इसकी जिम्मेदारी लेना होगा। इस क्षेत्र को वर्षा से लेबर जोन बना कर रख दिया गया है। जिसके कारण यहां के युवा वर्ग दूसरे प्रदेश जाने को अपना नियति मान लिए है। इस कुसंस्कृति को खत्म करना होगा। इसके लिए पहले क्षेत्र में रोजगार व कुटीर उद्योग पर जोर देना होगा। ये बातें शिवनगर के समाजसेवी विनोद शंकर झा लड्डू ने शुक्रवार की शाम प्रेस को संबोधित करते हुए कहा। श्री झा ने कहा कि जिस मिथिलाचंल को विद्वान व देवी-देवताओं की धरती की संज्ञा दी गई है। साक्षात महादेव उगना बनकर चाकरी की। कपिल मुनि की कपिलेश्वर, वशिष्ठ मुनि की बसैठ, लोमस श्रृषि की लोमा, फुलहर, कलना, सिद्धपीठ उच्चैठ भगवती, गाण्डीवेश्वर नाथ महादेव मंदिर, बाणेश्वर नाथ, भगवती सीता की प्रकट स्थल पुनौराधाम हो, इतने सारे तीर्थ स्थल है। जिसका विकास कर सभी स्थलों को तीर्थ स्थल के तौर पर घोषित हो जाए, तो मिथिलाचंल का काफी विकास हो सकता है। इससे रोजगार के साथ-साथ क्षेत्र का समुचित विकास संभव है। वहीं उन्होंने सभी युवाओं को मिथिला के विकास के लिए सतत प्रयास करने की अपील करते हुए कहा कि जब तक आप स्थानीय बनकर नहीं सोचेंगे, तब तक विकास नहीं हो सकता है। 


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