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हरियाली एवं स्वच्छता का प्रतीक बना निर्मला पार्क

बेनीपट्टी(मधुबनी)। मधुबनी जिले के बेनीपट्टी अनुमंडल के एसडीपीओ निर्मला कुमारी के एक विशेष प्रयास की चर्चा हर ओर हो रही है।एसडीपीओ के अथक प्रयास से संचालित ग्रीन बेनीपट्टी-क्लीन बेनीपट्टी के मुहिम से जहां र्प्यावरण की रक्षा के लिए वृक्षारोपण के कार्य युद्धस्तर पर किया गया, वहीं इसके संरक्षण के लिए एसडीपीओ लगातार कार्य कर रही है।प्लास्टिक बैग से होने वालें र्प्यावरण को खतरा के प्रति भी लोगों को जागरुक कर रही है तो ग्रामीण क्षेत्र के महिलाओं को कागज से निर्मित आकर्षक ठोंगे बनाने का प्रशिक्षण भी दे रही है।महिलाएं एसडीपीओ के प्रयास से आज अपने पैर पर खड़े होने का प्रयास कर रही है।वहीं इन सबके बीच एसडीपीओ का एक ओर प्रयास जो आज हर लोगों के जुबां पर तैर रहा है।एसडीपीओ के प्रयास से जिले का पहला पार्क बेनीपट्टी अनुमंडल कार्यालय के परिसर में बना है।जो हरियाली के साथ स्वच्छता का प्रतीक बन गया है।अनुमंडल के निर्मला पार्क में जगह-जगह मिथिला पेंटिग से सजी पक्का बैंच निर्मित है तो राहत के कुछ पल गुजारने के लिए वृक्ष के नीचे बैठने की व्यवस्था की गयी है।पार्क के बीचोंबीच पानी का फव्वारा पार्क की आकर्षकता को बढ़ा रही है।पार्क के संरक्षण के लिए स्थानीय लोग हमेशा तत्पर रहते है।पार्क में कहीं भी कचरा नहीं पाया जाता है।एसडीपीओ सुश्री कुमारी ने बताया कि पार्क के जरीये लोगों को पर्यावरण के महत्व बताये जा रहे है।लोग स्वच्छता के प्रति सजग हो रहे है।वहीं ग्रीन-क्लीन बेनीपट्टी के तहत महिलाओं को रोजगार दिया जा रहा है।गौरतलब है कि बेनीपट्टी के एसडीपीओ निर्मला कुमारी अपने पदस्थापना काल से ही मिथिला-मैथिली के उत्थान के प्रति कार्य करने, स्थानीय लोकपर्व को बढ़ावा देने, गरीबों की मदद करने एवं पर्यावरण के प्रति विशेष कार्य करने के लिए जानी जाती है।एसडीपीओ ने बताया कि पुलिसिंग कार्य से उन्हें अधिक समय नहीं मिल पाता है।जो भी समय मिलता है, लोगों के भलाई एवं पर्यावरण के प्रति कार्य करती है।वहीं एसडीपीओ ने बताया कि उनका प्रयास है कि लोग प्लास्टिक के बैग का इस्तेमाल नहीं करें, इस बैग से पर्यावरण को काफी क्षति होती है।वहीं स्थानीय लोगों की माने तो एसडीपीओ के प्रयास से लोग अब जागरुक होने लगे है।विदित हो कि इससे पूर्व भी एसडीपीओ ने कोटपा अभियान को धरातल पर उतारने में काफी सकारात्मक पहल की थी।गांव स्तर पर ग्रामीणों के साथ बैठक कर लोगों को धू्रमपान व तंबाकू से होने वाले क्षति एवं बीमारी के संबंध में जानकारी देने का काम किया था।जिसका प्रभाव काफी पैमाने पर हुआ।

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