गिरफ्तार DPO स्थापना हुए निलंबित, BEO अब भी गिरफ्त से बाहर - BNN News

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2 Aug 2019

गिरफ्तार DPO स्थापना हुए निलंबित, BEO अब भी गिरफ्त से बाहर



बेनीपट्टी(मधुबनी)। मधवापुर में हुए फर्जी शिक्षकों की बहाली एवं वेतन भुगतान के मामले में शिक्षा विभाग संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। शिक्षा विभाग के प्रशासन सह अपर सचिव सुशील कुमार ने डीपीओ-स्थापना राजेश कुमार सिन्हा को निलंबित कर दिया है। न्यायिक हिरासत में होने के कारण निदेशक ने डीपीओ-स्थापना का मुख्यालय तय नहीं किया है। शिक्षा विभाग के सूत्रों की माने तो न्यायिक हिरासत से जमानत पर बाहर आने पर ही डीपीओ-स्थापना का मुख्यालय तय किया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि डीपीओ-स्थापना का जल्द जमानत होना संभव नहीं दिख रहा है। बता दे कि डीपीओ-स्थापना को 23 जुलाई की रात करीब साढे नौ बजे समहारणालय के गेट से गिरफ्तार किया गया था। डीपीओ के गिरफ्तारी के बाद जिलाधिकारी ने पूरे मामले की जानकारी शिक्षा विभाग को दी थी। इस बीच मधवापुर के पूर्व बीईओ सह पूरे कांड के मुख्य आरोपित उमेश बैठा की गिरफ्तारी नहीं होने से पुलिस के नाकामी की चर्चा चहूंओर हो रही है। लोगों की माने तो प्राथमिकी दर्ज होने के करीब तीन माह तक मधवापुर में बेखौफ होकर सरकारी कार्यों को अंजाम देने के समय पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही थी। जबकि, बीईओ पूरे मामले के मुख्य आरोपित थे। पुलिस ने अप्राथमिकी अभियुक्त डीपीओ-स्थापना को गिरफ्तार कर उठ रहे सवाल को तत्काल टालने का काम किया है। इस मामले में सेवानिवृत हो चुके बीईओ उमेश बैठा व वेतन विपत्र कर्मी अनिल लाल कर्ण की गिरफ्तारी घटना के खुलासे के लिए सबसे अहम थी। सूत्रों ने बताया कि दोनों की गिरफ्तारी नहीं होने के लिए सफेदपोश सक्रिय हो गए थे। जबकि, उमेश बैठा व अनिल लाल कर्ण के गिरफ्तारी के लिए एमएसयू के नेताओं ने मधुबनी में धरना तक दिया था। गौरतलब है कि अब तक इस मामले में डीपीओ-स्थापना के निलंबित होने से पूर्व मधवापुर के वेतन विपत्र कर्मी अनिल लाल कर्ण, डीपीओ कार्यालय के एक कर्मी निलंबित हो चुके है। वहीं एक अन्य कर्मी से डीईओ ने स्पष्टीकरण पूछा है। सूत्रों ने बताया कि डीपीओ-स्थापना के गिरफ्तारी के बाद कई कर्मी भूमिगत हो गए थे।

डेढ़ सौ फर्जी शिक्षक की बहाली में 39 शिक्षकों को कराया भुगतान
मधवापुर के पूर्व बीईओ व वेतन विपत्र कर्मी अनिल लाल कर्ण ने शिक्षा विभाग के लचर रवैया का लाभ लेते हुए मास्टर स्ट्रोक चाल चलते हुए जमकर फर्जी शिक्षकों की बहाली की। सूत्रों ने बताया कि दोनों ने जिला के शिक्षा विभाग के कार्यालय को मैनेज कर डेढ़ सौ फर्जी शिक्षकों में से रसूखदार 39 फर्जी शिक्षकों का वेतन भुगतान करा दिया। जिसमें सफेदपोश के साथ मीडियाकर्मी व मीडियाकर्मियों के सगे-संबंधियों को भी राशि भुगतान की गयी। पूरे मामले का जब दैनिक सन्मार्ग ने पटाक्षेप कर एडवाईस के जांच पर प्रकाश डाला तो जांच टीम में शामिल पूर्व डीईओ श्रीराम कुमार, एसडीएम मुकेश रंजन व एसडीपीओ पुष्कर कुमार ने जब एडवाईस की जांच की तो कई बिंदूओं का पटाक्षेप हो गया। एडवाईस में जमकर नंबरिंग का खेल कर फर्जी शिक्षकों को प्रति शिक्षक करीब 78 हजार रुपये का भुगतान कराया गया। खबर पर जांच टीम की मुहर लगते ही प्रतिवेदन के आधार पर डीएम शीर्षत कपिल अशोक ने डीईओ को तत्काल नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दिया। डीएम के आदेश पर 23 मार्च को उमेश बैठा, अनिल लाल कर्ण व अज्ञात के खिलाफ कांड संख्या-135/19 दर्ज कराई गयी।

फर्जी शिक्षकों पर हो चुकी है निलाम पत्र वाद दायर
प्राथमिकी दर्ज होते ही दवाब में आ चुके डीपीओ-स्थापना अपनी कलई खुलने के डर से 22 मई को बेनीपट्टी अनुमंडल में फर्जी शिक्षकों के खिलाफ निलाम पत्र वाद दायर कर दिया। निलाम पत्र वाद दायर किए जाने में भी डीपीओ ने होशियारी दिखाते हुए एक शिक्षिका के पति के नाम की जगह सिर्फ पता अंकित कर दिया।

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