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विकास के लिए वर्षों से तरस रहा करहारा गांव

बेनीपट्टी(मधुबनी)। आजदी के कई दशकों के बाद भी बेनीपट्टी प्रखंड के करहारा गांव विकास की रेलगाड़ी से नहीं जुड़ पाया है। जिसके कारण आज भी करहारा गांव के लोगों को आधुनिकता की दौर में लोग कितने विकास के पायदान तक पहुंच गये, पता नहीं है। दरअसल ,करहारा पंचायत अधवारा समूह के धौंस नदी से चारों और से घिरा हुआ है। नदियों के जलस्तर बढने से ही गांव में बाढ आ जाती है । जिससे गांव के लोग न तो फसल उगा पाते है न इस दरम्यान गांव से बाहर निकल पाते है। पूरे पंचायत में बर्बादी का आलम ये है कि कहीं भी गांव में बेहतर सडक तक नहीं है। अधिकतर लोगों को महराजी बांध के सहारे ही गांव से बाहर निकलना होता है। वहीं गांव में शिक्षा व स्वास्थ्य की सुविधा सही ढंग से नहीं हो रही है। गांव के गज्जू यादव ने बताया कि गांव में आने के लिए कोई भी रास्ता नहीं है। धौंस नदी पर पुल निर्माण की मांग कब से की जा रही है, मगर कोई सुन नहीं रहा है। वहीं गांव की बर्बादियों की ओर दिखाते हुए पंचायत के पूर्व मुखिया भोगेन्द्र मंडल ने बताया कि पूरे पंचायत में लगभग पंद्रह हजार की आबादी है। जिसमें यादव व मुसलमान की अधिक जनसंख्या है। पूर्व मुखिया ने कहा कि हर चुनाव में नेता पुल के नाम पर वोट लेते आ रहे है, मगर किसी ने पुल तो दूर गांव में कच्ची सडक तक नहीं बनाया। ग्रामीण पथ नहीं होने व बाढग्रस्त पंचायत होने से लोगों को बहुत परेशानियों का सामना करना पडता है। बतातें चलें कि बेनीपट्टी प्रखंड मुख्यालय से लगभग सात किलोमीटर पश्चिमी भाग में करहारा पंचायत स्थित है। जहां के लोग आज भी साल के करीब छह माह तक नाव की सवारी करते है। पंचायत बेनीपट्टी व हरलाखी दो विधानसभा क्षेत्र के अर्न्तगत होने से पंचायत में विकास सही तरीके से नहीं पहुंच पायी है। इस संबध में प्रखंड विकास पदाधिकारी डा. अभय कुमार ने बताया कि सचमुच करहारा के लोगों को परेशानी है, उनके स्तर से जो भी संभव होगा,वो किया जायेगा। विकास कार्य हर पंचायत में हो उनकी यहीं प्रयास है।



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