बेनीपट्टी (मधुबनी) : इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है. एनडीए खेमे बेनीपट्टी विधानसभा सीट को लेकर चल रही मैराथन मंथन के बीच BJP ने उम्मीदवार का नाम तय कर लिया है. बेनीपट्टी के पूर्व विधायक व मंत्री विनोद नारायण झा एक बार फिर से बीजेपी की टिकट पर बेनीपट्टी से मैदान में होंगे. दिल्ली में चल रहे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के मंथन के बाद यह फैसला लिया गया है. जिसकी घोषणा आज मंगलवार को पटना में हो सकती है.

गौरतलब है कि बेनीपट्टी सीट से बीजेपी के तरफ से टिकट के दावेदार मधुबनी के पूर्व बीजेपी जिलाध्यक्ष घनश्याम ठाकुर को भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने सोमवार की अहले सुबह दिल्ली बुलाया गया था. 

पिता के निधन के बाद गले में उतरी लिए घनश्याम ठाकुर पार्टी के निर्देश पर दिल्ली पहुंचे थे. जहां उनकी बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल, बिहार बीजेपी प्रभारी भूपेंद्र यादव, राधा मोहन सिंह,  नित्यानंद राय की कई राउंड की बातचीत हुई, जिसमें घनश्याम ठाकुर की उम्मीदवारी पर सहमति भी बन चुकी थी. जिसकी खबर देर रात उनके समर्थकों के बीच भी पहुंच चुकी थी. लेकिन तारीख बदलने के साथ ही पार्टी का फैसला विनोद नारायण झा के पक्ष में चला गया.

अंतिम समय के फैसले में पूर्व विधायक व मंत्री विनोद नारायण झा के पूर्व से रही दावेदारी और दवाब के कारण पार्टी ने फिर से 2020 के चुनाव में उन्हें बेनीपट्टी विधानसभा से चुनावी मैदान में उतारने का फैसला लिया है.

टिकट के औपचारिक एलान से ठीक एक दिन पहले घनश्याम ठाकुर के दिल्ली तलब किये जाने से इस बात को बल मिल रही थी कि घनश्याम ठाकुर को टिकट मिल सकता है. दिल्ली रवाना होने से पहले BNN से हुई बातचीत में भी घनश्याम ठाकुर टिकट को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त थे. 

इससे पहले पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा विनोद नारायण झा को एमएलसी कार्यकाल पूरा नहीं होने का हवाला देकर इस बार चुनाव नहीं लड़ने के लिए मनाने का प्रयास किया जा रहा था. लेकिन पहले से चुनाव लड़ने की इक्षा व्यक्त कर चुके मंत्री विनोद नारायण झा अपनी मांग पर अड़े हुए थे. जिसे अंततः पार्टी ने मान लिया है. पार्टी के इस निर्णय के बाद घनश्याम ठाकुर की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

बता दें कि विनोद नारायण झा बेनीपट्टी सीट से बीजेपी की टिकट पर वर्ष 2010 में विधायक निर्वाचित हुए थे, वहीं 2015 के चुनाव में उन्हें महागठबंधन समर्थित कांग्रेस उम्मीदवार भावना झा के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था. जिसके बाद उन्हें पार्टी ने एमएलसी बनाया था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महागठबंधन से समर्थन वापस लेकर एनडीए में आने के बाद उन्हें पीएचईडी मंत्री बनाया गया था.


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