बेनीपट्टी(मधुबनी)। बिहार के मिथिलाचंल में आध्यात्मिक माहौल में चौरचन की पूजा की गई। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश चतुर्थी के साथ ही मिथिला में इस दिन चौरचन मनाया जाता है। यह त्योहार खासकर मिथिला के क्षेत्र में बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। कुछ देर पहले क्षेत्र के सभी श्रद्धालुओं ने चौरचन को मनाया। इस दिन चन्द्रदेव की उपासना की जाती है।

 कहते है कि जो व्यक्ति गणेश चतुर्थी के शाम भगवान गणेश के साथ चन्द्रेदव की पूजा करता है, वह चंद्र दोष से मुक्त हो जाता है। चौरचन के संबंध में पुराणों में ऐसा वर्णन है कि इसी दिन चंद्रमा को कलंक लगा था। यू ंतो मिथिला हमेशा से ही पूजा-पाठ के लिए प्रसिद्ध रहा है। इस क्षेत्र में उगते सूर्य के साथ अस्त हो रहे दिनकर की पूजा भी होती है तो वहीं भाद्रपद में चन्द्रदेव की भी पूजा की जाती है। आपको बता दे कि इस पूजा के दिन सुबह से शाम तक व्रत रख कर दिन भर पूजा पाठ का दौर जारी रहता है। शाम के समय आंगन को गाय के गोबर से लीपकर साफ कर पीठार से अरिपण किया जाता है। चांद बनाया जाता है। वहीं घर के सदस्य के अनुसार पकवानों की डाली, दही का इस पूजा में खास महत्व है। वहीं केला, खीरा आदि से हाथ उठाकर सिंहः प्रसेनमवधिस्सिंहो जाम्बवता हतः। सुकुमार मन्दिस्तव होम्म स्यामन्तकः स्त, इस मंत्र को पढ़ पकवान को चंद्रमा को समर्पित किया जाता है।


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