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करहारा में विकास के नाम पर मिला नाव यात्रा की सौगात

बेनीपट्टी(मधुबनी)। अधवारा समुह के धौंस नदी के जलस्तर में वृद्धि होने के साथ ही करहारा गांव में नाव का परिचालन शुरू हो गया। अब ग्रामीण नाव के सहारे जान हथेली पर रखकर एक ओर से दूसरे ओर की ओर जा रहे है। नाव में सवार लोगों के जिंदगी भगवान भरोसे ही है। एक तरफ नदी का जलस्तर धीरे धीरे आसमान छूता जा रहा है और दूसरी ओर ग्रामीण नाव और चचरी के सहारे ही नदी पार करने को विवश है। बता दें कि करहारा गांव आजादी के बाद भी विकास से कोसो दुर है। यहां चलने के लिये सड़क, नदी पर पुल, बिजली सहित कोई मुलभूत सुविधा नही है। जबकि पुरा गांव अधवारा समुह के धौंस नदी के कालरूपी मुंह से घिरा हुआ है। बाढ़ के दिनों यह गांव टापू में तब्दील हो जाता है तथा एक महिनें तक कोई ग्रामीण बाहर नही निकल पाते है। कई सरकारे बनी तथा कई जनप्रतिनिधि चुने गये, मगर इस गांव का थोड़ा भी विकास नही हो सका है। इस गांव के ग्रामीणों को आजतक झूठे आश्वासन के अलावें और कुछ नसीब नही हुआ है। सबसे बड़ी बात तो यह है कि इस गांव में लोग अपने बेटे का शादी करने से कतराते है और करते भी है तो दहेज में नाव की मांग करते है। करहारा के ग्रामीण आठ महिने चचरी पुल के सहारे अपना जीवन व्यतित करते है। मगर अब नदी के जलस्तर में काफी वृद्धि होने के कारण चचरी नदी के पानी में बह गया। वहां के ग्रामीण अब नाव के सहारे नदी को पार कर रहे है। गांव के लोग धौंस नदी पर पुल निर्माण की मांग को लेकर कई बार आंदोलन किये, सरकार तथा उनके मुलाजिम एवं जनप्रतिनिधियों को आवेदन के माध्यम से कई बार अवगत कराया लेकिन ग्रामीणों को अबतक सिर्फ आश्वासन ही मिला। नतीजा यह है कि बीमार मरीजों को खाट पर लादकर या फिर महराजी बांध के सहारे सोईली चौक लाया जाता है।
 
क्या कहते है ग्रामीण

करहारा पंचायत की मुखिया शिला देवी, पूर्व मुखिया देवेंद्र यादव, शिवकुमार साफी सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि आजादी के बाद से लेकर अबतक इस गांव के लोगों को कुछ विकासात्मक कार्य देखने को नही मिला है। गांव में सड़क, बिजली, पुल पुलिया, टेलीफोन, यातायात सहित किसी प्रकार की सुविधा नही है। आने जाने के लिए सड़क नही रहने के कारण कोई दुर्घटना या आगलगी जैसी घटना होने पर एम्बुलेंस व अग्निशमन गाड़ी तक नही पहुंच पाती है। बरसात के दिनों गांव के सड़क पर लोगो के लिए घर से निकलना मौत को आमंत्रण देने के बराबर हो जाता है। जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से लोग समस्याओ की दर्द से कराह रहे है। नेताओ के द्वारा इसकी सुधि तक नही ली जाती है। कई चुनाव आए व गए लेकिन करहारा गांव जश की तश समस्याओं से जूझ रहा है।

पुल निर्माण को लेकर सीएम को भेजा आवेदन

ई0 विनोद शंकर झा ने करहारा गांव के धौंस नदी पर पुल निर्माण कराये जाने को लेकर सीएम बिहार व विभागीय आलाधिकारी को पत्र भी भेजा था। मगर अबतक इस दिशा में कोई पहल नही किया गया है। पत्र में उन्होंने कहा है कि करहारा गांव विकास से कोसो दुर है। गांव में कोई सुविधा उपलब्ध नही है। सबसे बड़ी बात है कि गांव चारो ओर से धौंस नदी से घिरा हुआ है और नदी पर पुल नही है।

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