बेनीपट्टी(मधुबनी)। कब होगी मधवापुर के फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई? फर्जी शिक्षक बहाली के किंगपिन कब होंगे कानून के जद में? ऐसे कई सवाल है जो आज भी निरुत्तर बने हुए है। वही, खुलासा के कई माह के बाद भी फर्जी शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई न होने से विभागीय अधिकारी के कार्यशैली पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है। आखिर, किस वजह से सात-सात महीने के अवैध तरीके से पैसा दिए जाने के बाद भी राशि रिकवर की प्रक्रिया नहीं कि जा रही है। जबकि, अन्य मामलों में प्रशासन तुरंत एक्सन में आ जाती है, लेकिन इस मामले को विभाग गंभीरता से नहीं ले रही है। उधर, डीएम के द्वारा गठित जांच टीम भी जांच के बजाय शिथिल पड़ी हुई है। जिससे लोगों को काफी आशाएं है। जांच टीम को करीब दस दिन पूर्व ही डीपीओ के द्वारा एडवाइस उपलब्ध कराये जा चुके है। सूत्रों की माने तो अभी तक जांच टीम एक जगह पर बैठकर जांच के विभिन्न बिंदुओं पर भी चर्चा शुरू नहीं कि है। उधर, सूत्रों ने बताया कि जांच को टालने के लिए पैरवी-पैगाम भी शुरू कर दिया गया है। जानकारों ने बताया कि सही जांच में कई सफेदपोश व अधिकारी फंस जाएंगे। इसलिए, जांच को टालने के लिए जुगत लगाए जा रहे है। बता दे कि जांच टीम के गठन से पूर्व ही डीपीओ स्थापना राजेश सिन्हा ने मधवापुर बीइओ को पूछे गए स्पष्टीकरण में फर्जी तरीके से वेतन भुगतान कराने की बात कह चुके है। डीपीओ ने बीइओ पर खुलकर निर्धारित शिक्षकों से अधिक का वेतन उठाव करने की बात कही है। बावजूद, विभाग फर्जी शिक्षकों पर मेहरबान साबित हो रही है। आरटीआई एक्टिविस्ट विश्वनाथ सहनी ने बताया कि इस खेल में जितने सफेदपोश है, वो सही से जांच नहीं होने के लिए हर हथकंडा अपनाएंगे। कुछ ही दिनों के बाद लोकसभा चुनाव की डुगडुगी हो जाएगी। फिर, चुनाव के आड़ में कोई कार्रवाई नहीं होगी। श्री सहनी ने बताया कि उनके पास भी एडवाइस उपलब्ध हो गयी है। जल्द ही वे निगरानी व कोर्ट जाएंगे। कोर्ट में पूरे मामले का जांच कराया जाएगा।


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