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अकौर के भुवनेश्वरी भगवती के दरबार से खाली नहीं जाते श्रद्धालु

बेनीपट्टी(मधुबनी)।  धार्मिंक व सांस्कृतिक विरासत से लबरेज अकौर गांव में अंकुरित भगवती भुवनेश्वरी की पूजा आदि काल से की जाती है। बेनीपट्टी प्रखंड मुख्यालय से करीब सात किमी पूर्वी-उत्तरी कोणे पर अवस्थित भुवनेश्वरी अंकुरित भगवती है। माना जाता है कि भुवनेश्वरी भगवती के दरबार से आज तक कोई भक्त खाली हाथ नहीं लौटता है। खास तौर नवरात्रा में भगवती के दरबार में मनोवांछित वरदान के लिए भक्त देर शाम तक परिसर में डटे रहते है। वहीं पूरे नवरात्रा में ग्रामीण भी पूजा में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेकर गांव में आध्यात्मिक माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाते है। बता दें कि बेनीपट्टी का अकौर गांव राजा जनक के भाई राजा कुशध्वज के राज्य की राजधानी थी। इस बात के प्रमाण आज भी मौजूद है। किवदंती है कि राजा कुशध्वज भी भुवनेश्वरी की पूजा कर आर्शिवाद प्राप्त कर राजपाट चलाये है। उक्त समय में भगवती के अंकुरित होने से माना जाता है कि भगवती वर्षों पूर्व इस गांव में अंकुरित हुई थी। मंदिर करीब सोलह कठ्ठा में अवस्थित है। जहां कई देवी-देवताओं की स्थापना की गयी है। वहीं गांव में मूर्ति के बरामदगी होने के बाद मूर्ति को साफ कर इसी मंदिर में रखा जाता है। फिलहाल, मंदिर में सात फीट का भगवान विष्णु का आदमकद मूर्ति के साथ लक्ष्मी-नारायण की मूर्ति, सीताराम, भगवान सूर्य, विराट रुपी भगवान की मूर्ति समेत अन्य देवी-देवताओं की मूर्ति स्थापित है। जिसकी अनवरत पूजा-अर्चना की जाती है। ग्रामीण अरुण झा, मुन्ना झा, मुकेश कुमार समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि इस मंदिर को विशेष सहायता की आवश्यकता है। बिहार सरकार इस मंदिर को विकसित करें तो श्रद्धालुओं के साथ देश-विदेश के श्रद्धालु भगवती का दर्शन कर पाएंगे।

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