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इंडो-नेपाल समेत कई गांव को जोड़ने वाली पथ वर्षों से अतिजर्जरता की चपेट में आने से राहगीर परेशान

बेनीपट्टी(मधुबनी)। इंडो-नेपाल को परस्पर जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण सड़क की समय पर मरम्मत नहीं होने के कारण मधवापुर एवं वासुकी बिहारी उतरी पंचायत सहित पड़ोसी मित्र राष्ट्र नेपाल के महोत्तरी और धनुषा जिले के दर्जनों गांव को जोड़ने वाली सबसे कम दूरी की विरीत -बिहारी प्रमुख सड़क पिछले बारह वर्षों से पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। जिसके कारण इन दोनों पंचायत वासियों के अलावे सीमावर्ती क्षेत्र के दर्जनों गांव के हजारों लोगों को भारी परेशानी होती है। वर्ष-2006 में तत्कालीन पंचायत समिति सदस्य उमेश सिंह के द्वारा दो पंचायत को जोड़ने के मकसद से इस सड़क पर मिट्टीकरण एवं खरंजाकरण करवाया गया था। लेकिन, मधवापुर -मधुबनी मुख्य पथ में मधवापुर से बिहारी तक जर्जर रहने एवं इस सड़क किनारे एसएसबी की सख्ती के कारण व्यवसायियों के सभी तरह के मालवाहक वाहनों का परिचालन इसी पथ से होता रहा। जिसके कारण उसी समय यह नई सड़क पुरी तरह जर्जर हो गयी। वाहनों के अधिक परिचालन एवं समय पर इसकी मरम्मत नहीं कराए जाने के कारण इस पथ में अधिकांश जगहों पर खरंजा उखड़कर जर्जर हो चुका है। जिसके कारण पथ पुरी तरह गड्ढ़े में तब्दील हो गया है। गड्ढ़े में तब्दील यह सड़क पढ़ने जाने वाले स्कूली बच्चों, खेती करने वाले किसान-मजदूरों एवं राहगीरों के लिए जानलेवा बन चुकी है। सुखाड़ के समय में तो लोग किसी तरह जान जोखिम में डालकर आते -जाते हैं। लेकिन, बरसात के दिनों में इस पथ पर पैदल चलना भी राहगीरों के लिए महफूज नहीं है। आए दिन स्कूली बच्चे, किसान -मजदूर एवं राहगीर इस पथ पर दुर्घटना के शिकार होते रहते हैं। इस सड़क की जर्जरता और संभावित खतरे को देखकर प्रखंड के मधवापुर, रामपुर, विरीत, बिहारी, मजकोठिया, गुलरिया, ब्रम्हपुरी, वासुकी, जानकीनगर, परसा, रामनगर कजरा, अखरहरघाट, नेपाल के मटिहानी, मुसहरनियां, मुखियापट्टी, तुलसियाही निकास, जब्दी, कोल्हुआ,टोला सहित दर्जनों गांव के लोग सहमे रहते हैं। महज डेढ़ से दो किमी की दूरी तय करने के लिए इन गांवों के लोग रूट बदलकर चार से पांच किमी की लंबी दूरी तय कर जाते-आते हैं। इस संबंध में पूछे जाने पर मधवापुर के बीडीओ एसएस राय ने बताया कि पथ की मरम्मती कराने के प्रयास किए जाएंगे।

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