बेनीपट्टी(मधुबनी)। जनप्रतिनिधियों के अड़ियल रवैया के कारण मधवापुर प्रखंड के सलेमपुर पंचायत का बोकहा गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। गांव के करीब बारह सौ परिवारों के वोट पर न जाने कितने जनप्रतिनिधि निर्वाचित होकर अपने भाग्य को पलट लिया, लेकिन इन मतदाताओं के भाग्य को पलटने की हिम्मत अब तक किसी ने नहीं दिखाई है। जिसके कारण बोकहा के लोगों को आज भी पगडंडी होकर आवाजाही कर रहे है। पगडंडी की स्थिति भी इतनी खराब है कि बारिश के मौसम में तो दूर रातों को आपात स्थिति में निकलने से भी परहेज करते है। जगह-जगह असमान्य कच्ची पथ है। वहीं कैनाल के समीप तो पथ की स्थिति अत्यंत ही खराब है। गौरतलब है कि बोकहा गांव के बसे दो पूर्वी व पश्चिमी मुहल्लें में करीब बारह सौ परिवार बसते है। गांव के कुछ जगहों पर वर्षों पूर्व निर्मित सड़कें है। वहीं पांच माह पूर्व आए बाढ़ में गांव के मुख्य पूल के समीप कटाव हो गया था। जिसे मिट्टी डालकर भर दिया गया है। उक्त पूल पर चढ़ने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कटाव स्थल पर डाले गए ईंट-पत्थर के असमान्य होने से आवाजाही में ठोकर लगने की संभावना बनी रहती है। ऐसी स्थिति बीमार लोगों अथवा प्रसव वेदना से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को किस प्रकार मुख्यालय ले जाया जाता होगा, इसका अंदाजा लगाना सहज है। गांव के महेन्द्र यादव, किशोर कुमार भारती, नीरज यादव, पंडित यादव, छोटकन यादव, रामस्वार्थ यादव समेत कई लोगों ने बताया कि मुख्य सड़क के अभाव में बारिश के समय काफी परेशानी होती है। लगातार बारिश होने पर गांव में बाईक ले आना, संभव नहीं होता है। जानकारी दें कि साहरघाट-बेनीपट्टी मुख्य पथ से करीब दो किमी दूरी पर बोकहा गांव अवस्थित है। गांव में यादवों की जनसंख्या अधिक है। गांव में विकास कार्य धरातल पर नहीं होने के कारण गांव में मूलभूत सुविधाओं की घोर कमी देखी गयी। गांव में संचालित सरकारी स्कूल तालाब के किनारे संचालन हो रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि उक्त स्कूल का संचालन भी सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। जिससे गांव में शिक्षा का स्तर अभी भी गिरा हुआ है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गांव में मूलभूत सुविधाओं की कमी को खत्म कराने की मांग की है।


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