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विभागीय उपेक्षाओं का शिकार हो दम तोड़ रहा माधोपुर का वृजहरि चिकित्सालय

बेनीपट्टी (मधुबनी)। बिहार सरकार के स्वास्थ्य महकमा मरीजों के लिए सुविधाओं के भले ही ढिंढोरा पीट रही है। परंतु बेनीपट्टी प्रखंड के माधोपुर गांव स्थित वृजहरि चिकित्सालय, स्वास्थ्य विभाग के उपेक्षाओं के कारण आज दम तोड़ रहा है। अस्पताल का मात्र बुनियादी ढांचा ही शेष रह गया है। विभाग के द्वारा वृजहरि चिकित्सालय की बिलकुल सुध नहीं ली जा रही है। जबकि ये अस्पताल अपने उद्घाटन काल में मधुबनी जिले के मरीज के साथ समीपवर्ती जिला सीतामढ़ी व नेपाल के मरीजों का भी इलाज किया करता था। उद्घाटन के समय तीन एमबीबीएस प्रतिनियुक्त हुआ करते थे, अब आलम ये है कि स्वास्थ्य विभाग ने उक्त चिकित्सालय के लिए युनानी चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति कर दी है। वहीं चिकित्सालय में चिकित्सकों के साथ कई अहम पद वर्षों से रिक्त पड़ा हुआ है। जिसके लिए न तो जनप्रतिनिधियों की ओर से प्रयास किया जा रहा है, ओर न ही विभाग अस्पताल की सुध ले रही है। स्थिति इतनी विकट है कि उक्त चिकित्सालय में प्रतिनियुक्त कर्मी अपने सेवानिवृत की राह ताक रहे है। चिकित्सकों के अभाव के कारण न तो कर्मियों में सेवा भाव रह गया है, ओर न ही विभागीय कार्य का अनुभव। ग्रामीण सूत्रों की माने तो उक्त चिकित्सालय में कर्मी आराम से दिन काटने के लिए पोस्टिंग कराते है। फिलहाल, उक्त वृजहरि चिकित्सालय में एक युनानी चिकित्सक, आदेशपाल, किरानी, स्टोरकीपर व सेविका के साथ एएनएम पुष्पा कुमारी प्रतिनियुक्त है। जबकि दो चिकित्सक, रात्रि-प्रहरी, दो पुरुष कक्ष सेवक, माली के साथ नर्स (ए) ग्रेड का पद वर्षों से रिक्त पड़ा हुआ है।
                सीएम ने किया था चिकित्सालय का उद्घाटन
माधोपुर गांव के पूर्व विधान परिषद् सदस्य हितनारायण झा के अथक प्रयास से माधोपुर गांव के आसपास स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के लिए वर्ष-1981 में अस्पताल का निर्माण कराया। जहां तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. जगन्नाथ मिश्रा ने 23 जनवरी को उक्त अस्पताल का उद्घाटन किया था। उक्त समय विभाग की ओर से चिकित्सालय को मरीजों को दी जाने वाली तमाम सुविधाओं से लैस कर दिया था। उक्त समय में विभाग की ओर से तीन एमबीबीएस की तैनाती की गयी थी। दवा एवं स्वास्थ्य कर्मी हमेशा उपलब्ध होते थे। जल्द ही अस्पताल की ख्याति इतनी बढ़ गयी कि आसपास के जिलों के मरीज यहां आकर इलाज कराने लगे। ग्रामीणों की माने तो अस्पताल उद्घाटन के दस-पंद्रह वर्ष सही ढंग से चला। उसके बाद स्थिति खराब होने लगी। फिर चिकित्सक के कमी को दूर करने के लिए पीएचसी के चिकित्सक यहां आकर समय देने लगे। अब ऐसी स्थिति हो गयी है कि न तो समय पर चिकित्सक पहुंचते है, ओर न ही मरीज का इलाज किया जाता है। इलाज कराने वाले मरीज को बेनीपट्टी रेफर कर दिया जाता है। संसाधन के अभाव में चिकित्सक इलाज नहीं कर पाते है।
                  बीस बेड के अस्पताल में बेड की समस्या
बेनीपट्टी का एकमात्र बीस बेड का वृजहरि चिकित्सालय में स्वास्थ्य विभाग की उपेक्षाओं के कारण माधोपुर का ये अस्पताल कम ओर दलान अधिक प्रतीत हो रहा है। बीस बेड का अस्पताल का दर्जा प्राप्त अस्पताल में बेड की भी घोर किल्लत है। जानकारी के अनुसार अस्पताल में बेड के साथ दवा भंडार योग्य फ्रीज समेत अन्य संसाधन की घोर कमी है। दस कठ्ठा से अधिक भूखंड पर निर्मित चिकित्सालय विभाग की उपेक्षा के कारण सामाजिक बैठक करने की जगह बन गयी है। ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी के मौसम में लोग यहां आराम करने के लिए आते है। गौरतलब है कि अस्पताल की भूखंड को कई लोगों के द्वारा अतिक्रमित भी कर लिया गया है। नवगाछी से इलाज कराने के लिए आई नीलम देवी ने बताया कि अस्पताल में दवा चेक कराने के लिए आई थी, लेकिन डॉक्टर साबह नहीं आए हुए है।



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