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संसाधन व कर्मियों की किल्लत से जूझ रहा पीएचसी

बेनीपट्टी (मधुबनी)। अनुमंडल मुख्यालय के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र संसाधन व कर्मियों के किल्लत के कारण अपने लक्ष्य से भटक रही है। दवा, चिकित्सक व अस्पताल कर्मियों की कमी के कारण मरीज को समय पर स्वास्थ्य सेवा की सुविधा नहीं मिल पा रही है। चिकित्सकों की कमी का आलम ये है कि दुर्घटना में जख्मी मरीज को अधिकांश रेफर कर दिया जाता है। विभागीय सूत्रों की माने तो पीएचसी में संसाधन की घोर कमी है। अनुमंडल मुख्यालय के पीएचसी होने के बावजूद पीएचसी में एक ही ड्रेसर व फार्मासिस्ट प्रतिनियुक्त है। सूत्रों की माने तो दुर्घटना के मरीज को ड्रेसर व अन्य कर्मियों के द्वारा ही प्राथमिक उपचार कर रेफर कर दिया जाता है। वहीं पीएचसी में अक्सर एंटी रैबिज, एंटी वैनम, कफ सिरप की कमी रहती है, हैरत है कि कभी-कभी पीएचसी में रुई तक की व्यवस्था नहीं होती है।मरीज के परिजन को बाहर से ही रुई खरीद करनी पड़ती है। प्रसूति कक्ष में भी संसाधन की कमी के कारण अक्सर तू-तू-मैं-मैं देखने को मिलता है। प्रसूति कक्ष में प्रसव कराने के लिए गलव्स तक बाहर से खरीद करनी पड़ती है। करीब दो वर्ष से प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में महिला चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति नहीं की गयी है। फलस्वरुप, महिला मरीजों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है।खासकर प्रसूति के मामले में तो परिजनों को भारी समस्या होती है। इस समस्या का निदान के लिए पूर्व के रोगी कल्याण समिति से लेकर वर्तमान कार्यरत रोगी कल्याण समिति के बैठक में कई बार महिला चिकित्सक के प्रतिनियुक्ति के लिए प्रस्ताव पारित किया जा चुका है। परंतु हर बार प्रस्ताव फाईलों तक ही सिमट कर रह जाता है। पीएचसी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में कुल दस चिकित्सकों का पद है।परंतु इसके उलट मात्र तीन चिकित्सक के भरोसे ही पीएचसी का संचालन किया जा रहा है, रही कसर आयुष चिकित्सकों के भरोसे पूरा किया जाता है। जानकारी के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में फिलहाल चार आयुष चिकित्सक एवं एक दंत चिकित्सक की नियुक्ति है। स्वास्थ्य प्रबंधक ने संसाधन व कर्मियों की घोर कमी की बात को मानते हुए बताया कि स्थिति हर जगह ही ऐसी ही है। महिला चिकित्सक सदर अस्पताल को छोड़ कर कही नहीं है।वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सा पदाधिकारी रविन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि विभाग के द्वारा दिये गये सभी संसाधनों से मरीजों का इलाज किया जाता है। महिला चिकित्सक की प्रतिनियुक्ति के लिए कई बार पत्राचार किया जा चुका है।

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