बेनीपट्टी(मधुबनी)। बिस्फी के पतौना ओपी के जगवन पूर्वी के कटैया निवासी रामाधार सहनी की मौत मामले में रविवार को हत्या का मामला दर्ज किया गया। जिसमें श्रवण सहनी समेत नौ लोगों को आरोपित किया गया है। उक्त एफआईआर रामाधार सहनी के आये पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने के कई दिनों बाद दर्ज की गई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद भी पुलिस निष्क्रिय बनी हुई थी।

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जिसके बाद पूरे मामले को BNN News Benipatti ने विस्तार से खबर दी थी। परिजनों ने साफ साफ लहजो में ओपीध्यक्ष विजय पासवान पर मामले को रफा दफा करने का आरोप लगाया था। वही, इस मामले को लेकर परिजनों ने हर पुलिस अधिकारियों से गुहार लगाते रहे, लेकिन हर अधिकारी पल्ला झाड़ने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते रहे। जबकि, घटनास्थल पर मिले रामाधार सहनी के शव पर बने जख्म व बह रहे रक्त से स्पष्ट हो रहा था, की रामाधार की मौत डूबने से नहीं हुई है।उक्त स्थल पर भी परिजन बदहवास होने के बाद भी हत्या की आशंका जता रहे थे। लेकिन, परिजनों का आरोप है कि उक्त स्थल पर ओपीध्यक्ष ने सादा कागज पर हस्ताक्षर लेकर यूडी कांड अंकित कर दिया।

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अब सवाल है कि जब शव को देखने से ही प्रथमदृष्टया संदिग्ध मौत का मामला सामने आ रहा था। परिजन हत्या का आरोप लगा रहे थे, तब किस दबाव में यूडी कांड अंकित किया गया?

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के कई दिनों बाद आखिर क्यों हत्या का मामला दर्ज किया गया, रिपोर्ट आते ही केस क्यों नहीं दर्ज हुई?

आखिर, अब तक हत्यारोपितों की गिरफ्तारी क्यों नही हो सकी है?

इस तरह के कई सवाल है, जिसका जवाब पुलिस को देना चाहिए। अब देखना चाहिए कि, पतौना ओपीध्यक्ष के लापरवाही पर क्या कार्रवाई होती है।


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