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कैनबास पर थिरकते एसडीपीओ निर्मला के हाथों के अंगूली

बेनीपट्टी(मधुबनी)। कन्हैया मिश्रा : पुलिस का नाम सुनते ही अमूमन लोग उसके वर्दी की रौब से कांप जाते है।पुलिस का नाम जुबां पर आते ही लोग तरह-तरह की बातें करने लगते है,लेकिन मधुबनी जिले के बेनीपट्टी अनुमंडल में पदस्थापित एसडीपीओ निर्मला कुमारी कुछ अलग ही तरह की पुलिस अधिकारी है, कभी महादलित बस्तियों में जाकर महिलाओं व बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरुक करना तो कभी एक शिक्षिका बनकर स्कूलों में बच्चों को पढ़ाती नजर आ जाती है।इन सबके बीच एसडीपीओ क्षेत्र के अपराधियों को भी कानून के फंदे में डालने से नहीं गुरेज करती है। गौरतलब है कि एसडीपीओ के इस अदा के कारण क्षेत्र के अधिकांश लोग कभी उन्हें दीदी कहती है तो कभी वर्दी में लेडी सिंघम।जी हां, बेनीपट्टी के एसडीपीओ निर्मला कुमारी अपने नाम के अनुरुप ही मन व कार्य से भी निर्मल है।अपराधियों के बीच निर्मला का नाम आते ही जहां घिग्घी बंध जाती है, वहीं उनके प्रतिभा को देख हर कोई उनके हुनर की तारीफ करते नहीं थकता।इन दिनों एसडीपीओ निर्मला कुमारी का एक प्रतिभा की तारीफ हर कोई कर रहा है,जिसकी चर्चा आम होते जा रही है।एसडीपीओ निर्मला मधुबनी पेंटिग में भी महारत हासिल कर चुकी है,उनके द्वारा बनाये गये कई पेंटिग तो ऐसे है,मानो वो कोई पुलिस अधिकारी नहीं ,बल्कि कोई कलाकार अपनी बेमिसाल फन पेश किया हो। 

एसडीपीओ निर्मला कुमारी बताती है कि मधुबनी पोस्टिंग से पहले ही वो अक्सर मधुबनी पेटिंग की चर्चा सुनती थी, मधुबनी में आने के बाद पेंटिग की कला को समीप से जानने का मौका मिला तो उसके खुबसुरती के साये से उसके लिए निकल पाना मुश्किल हुआ।बस यहीं से सफर शुरु हुआ।जानकारी दे कि एसडीपीओ निर्मला कुमारी के पदस्थापना के बाद सही मायने में पुलिस व आम जनता के बीच समनव्य देखने को मिला।निर्मला कुमारी सहसा व बेहिचक लोगों से मिलकर उनकी समस्याओं को दूर करने का काम करती है।जिसके कारण उनकी चर्चा हर कोई करता है।खासकर वाहन जांच के दौरान कागजात के अभाव में पकड़ाये गये बाईक चालकों को बच्चों से फूल दिला कर उनकी भूल को याद कराना व हरित क्रांति को समर्थन देने के मकसद से वृक्षारोपण कराना जैसे कई उदाहरण पेश कर लोगों के मन से पुलिस के प्रति गलत सोच को भी बदल देने का महत्वपूर्ण काम कर दिखाया है।अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी निर्मला कुमारी ने बताया कि उनका पहला कार्य क्षेत्र में शांति-व्यवस्था को कायम रखना व अपराध पर कंट्रोल करना।बाद में समय मिलता है तो कुछ अलग काम कर लेती है।

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