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राहत के लिए तरस रहे मेघवन के बाढ़ से विस्थापित लोग

बेनीपट्टी(मधुबनी)। बाढ़ की त्रासदी के छठें दिन भी विस्थापित परिवारों को राहत के लिए तरसना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से राहत की सामाग्री दिये जाने के बाद भी पंचायत प्रतिनिधियों के द्वारा पीड़ितों के बीच सामान का वितरण नहीं किया जा रहा है।बाढ़ से विस्थापित लोगों का आका्रेश बढ़ता जा रहा है।जो कभी भी आन्दोलन का शक्ल अख्तियार कर सकता है।बाढ़ ने भले ही लोगों के बीच फर्क नहीं किया, परंतु पंचायत के प्रतिनिधि लोगों में फर्क कर राहत देने की जुगत सेट कर रहे है।प्रखंड के मेघवन पंचायत को गत दो दिन पूर्व राहत का सामान दिये जाने के बाद भी अब तक नहीं वितरण किया गया है।लोग भूखे पेट सोने को विवश है तो कुछ परिवार इधर-उधर से मांग कर अपने बच्चों का पेट भर रहे है।डीकेबीएम पथ पर बाढ़ के दिन से ही विस्थापित परिवारों ने बताया कि अचानक बाढ़ का पानी आ जाने से घर से कुछ भी निकाल नहीं पाया।सारा अनाज पानी में बह गया।माल-मवेशी को सड़क पर ले आये।बाढ़ के बाद से स्थिति खराब है।एक भी अधिकारी न ही कोई प्रतिनिधि घुम कर देखने के लिए आया है। नजरा की शहजादी खातुन छह दिनों से सात बच्चें के साथ सड़क पर घुम रही है, शायद किसी की नजर उसके परिवार पर पड़े ओर खाना मिले। वहीं मो. फिरोज, उधम कुरैसी, गुलनाज खातुन, मोहर्रम कुरैसी, मेघवन के रामदेव पासवान, लक्ष्मी पासवान, देवेंद्र यादव, मो. मुस्तफा बताते है कि मुखिया ने राहत का सामान का उठाव कर लिया है।लेकिन अभी तक वितरण नहीं किया है।गौरतलब है कि बाढ़ के छह दिन गुजर जाने के बाद भी मेघवन पंचायत पानी से घिरा हुआ है।लोग सड़कों पर खूले आसमान के नीचे रह रहे है।मवेशी पालकों के लिए समस्याओं का अंत नहीं हो रहा है। चारा के अभाव में पीड़ित इधर-उधर भटक रहे है।पंचायत के पैक्स अध्यक्ष सह पूर्व पंचायत समिति सदस्य प्रवेज आलम ने बताया कि राहत में पंचायत के साथ भेदभाव किया गया। बाढ़ के समय में पदाधिकारियों ने भेदभाव किया, अब पंचायत के प्रतिनिधि भेदभाव बरत रहे है।इस संबंध में एसडीएम मुकेश रंजन ने बताया कि किसी भी सुरत में बाढ़ पीड़ित के साथ भेदभाव नहीं किया जायेगा।राहत वितरण नहीं करने वालें प्रतिनिधियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जायेगी।



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