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शिक्षकों पर जांच नहीं होने पर एमएसयू ने दी आंदोलन की चेतावनी

हरलाखी (मधुबनी) : विगत दो सप्ताह पूर्व मिथिला स्टूडेंट यूनियन ने प्रेस रिलीज जारी कर मधुबनी जिले के हरलाखी प्रखंड में फर्जी तरीके से शिक्षकों के बहाली का आरोप लगाया था. जारी प्रेस रिलीज में 27 शिक्षकों के अवैध बहाली करने की जानकारी दी गई थी. जिसमें कुछ ऐसे भी आरोप थे की उप-शास्त्री पास को नियोजित किया गया है. इसके सन्दर्भ में एमएसयू ने हरलाखी प्रखंड प्रमुख को लिखित आवेदन देकर इसकी जांच की मांग की थी. जिसके बाद प्रखंड प्रमुख ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को आवेदन हस्तांतरित करके अग्रेतर कार्रवाई की मांग की थी. 

आवेदन के बाद हरकत में आई विभाग ने आनन-फानन में डीईओ के आदेश पर 2012 में हुई शिक्षक बहाली में अवैध प्रमाण पत्र पर बहाल 18 शिक्षकों के वेतन पर तत्काल यह कहकर रोक लगा दिया था की 3 दिनों के अन्दर सभी 18 शिक्षकों को अपने मूल प्रमाण पत्र प्रखंड विकास पदाधिकारी के समक्ष जमा किया जाय. जिसके सन्दर्भ में बीडीओ सरोज कुमार बैठा ने बताया है की अभी तक सभी शिक्षकों ने अपना मूल प्रमाण पत्र जमा नहीं किया है. जिन शिक्षकों का प्रमाण पत्र जमा हुआ है और जिनका प्रमाण पत्र जमा होना बांकी है उन सभी पर विभागीय प्रकिया के तहत आगे की जाँच की जाएगी, अगर कोई दोषी पाए जाते है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी. 

वहीं हरलाखी प्रखंड प्रमुख द्वारा जिला शिक्षा पदाधिकारी को सौपें गये 27 शिक्षकों के अवैध बहाली के बारे में प्रखंड विकास पदाधिकारी और प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए बताया की में उन्हें कोई विभागीय स्तर पर जानकारी नहीं मिली है. जिला से इस सन्दर्भ में किसी भी प्रकार का आदेश आता है तो आगे की कार्रवाई की जाएगी. 

उधर मिथिला स्टूडेंट यूनियन के जिला अध्यक्ष राघवेंद्र रमण ने बताया की लगभग 15 दिन बीत जाने के बाद भी 27 शिक्षकों के अवैध बहाली मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई है. इसके परे शिक्षा विभाग ने 5 साल पहले जाँच की गई शिक्षक बहाली में अवैध नियोजित शिक्षकों पर अब जाकर कार्रवाई की बात कर रही है. जबकि उन सभी 18 शिक्षकों का वेतन 2012 में जाँच होने के बाद भी अभी तक जारी है. विभाग व पदाधिकारियों के उदासीनता को देखते हुए यूनियन ने मुख्यमंत्री सहित शिक्षा विभाग के सभी पदाधिकारियों को मेल के माध्यम से यह जानकारी दी है की अगर समय रहते जल्द से जल्द सभी 27 शिक्षकों पर जाँच कर उसमें संलिप्त पदाधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की गई तो इसके खिलाफ आन्दोलन की शुरुआत की जाएगी.

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