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बेनीपट्टी (मधुबनी) : रामाकांत झा उर्फ़ रासबिहारी दास जी के द्वारा अनुमंडल मुख्यालय में स्थापित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल चैतन्य कुटी, पटना के सत्संग भवन, वृन्दावन के राधा गोविंद कुटी की अकूत देवोत्तर संपत्ति और महंतई के उत्तराधिकार को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। रमाकांत झा के वंशज नाती ललित किशोरी दास जी की मृत्यु के बाद अब उनके द्वारा बेनीपट्टी के निबंधन कार्यालय में पंजीकृत कराये गये अंतिम इच्छा पत्र के विपरीत जाकर कुछ पक्षों द्वारा सर्वे सर्वा होने का भ्रामक दावा पेश किया जा रहा है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय स्तर पर प्रशासन को आगाह करते हुए एक आवेदन अनुमंडल पदाधिकारी को सौंपा गया है।

तीन सेवायतों के कंधे पर थी संयुक्त जिम्मेदारी

उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार, रमाकांत झा के वंशज ललित किशोरी दास जी ने अपनी मृत्यु से पूर्व 18 जुलाई 2025 को बेनीपट्टी निबंधन कार्यालय (Deed No. 20) में अपनी अंतिम इच्छा पत्र पंजीकृत कराई थी। इस दस्तावेज़ में उन्होंने स्पष्ट रूप से किसी एक व्यक्ति को नहीं, बल्कि तीन व्यक्तियों दामोदर दास, प्रमोदवन बिहारी दास और ध्रुव कुमार झा को संयुक्त रूप से सेवायत नियुक्त किया था। अंतिम इच्छा पत्र की शर्तों के मुताबिक, इन तीनों को मिल-जुलकर कुटी की व्यवस्था देखनी थी।

जमीन बेचने पर है पूर्ण कानूनी रोक

ललित किशोरी दास जी ने अपनी अंतिम पंजीकृत इच्छा पत्र में यह सख्त हिदायत दी थी कि कोई भी सेवायत कुटी की चल-अचल संपत्ति (पैतृक  व अर्जित) को न तो बेच सकता है, न दान दे सकता है और न ही बंधक रख सकता है। इसके बावजूद, अब यह आशंका जताई जा रही है कि कुछ लोग पुराने दस्तावेजों या निजी वीडियो का सहारा लेकर खुद को एकमात्र सर्वे सर्वा साबित करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि रमाकांत झा के द्वारा स्थापित तीनों स्थानों की कीमती जमीनों का अवैध सौदा किया जा सके।

फर्जी वंशावली और अधिकार हथियाने की साजिश

प्रशासन को दिए गए आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ व्यक्ति संस्थापक के साथ अपनी फर्जी वंशावली जोड़कर मालिकाना हक जताने की फिराक में हैं। यह न केवल इच्छा-पत्र की शर्तों का उल्लंघन है, बल्कि रामाकांत झा व उनके द्वारा स्थापित तीनों स्थानों की संपत्ति को निजी संपत्ति में बदलने की एक बड़ी साजिश की ओर इशारा करता है।

प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

मामले को लेकर एसडीएम से मांग की गई है कि बेनीपट्टी निबंधन कार्यालय में ललित किशोरी दास जी के द्वारा 2025 की पंजीकृत इच्छा-पत्र को आधार माना जाए। किसी भी एकल व्यक्ति द्वारा जबरन महंत बनने या जमीन बेचने के प्रयासों पर तुरंत रोक लगाई जाए ताकि कुटी की धार्मिक गरिमा और देवोत्तर संपत्ति को सुरक्षित रखा जा सके।

सेवायत कौन होते हैं, उनके अधिकार क्या है 

कानून की दृष्टि में वायत केवल उक्त स्थान का प्रबंधक या ट्रस्टी होता है। जो किसी मंदिर या देवस्थान की सेवा-पूजा करने और उसकी संपत्ति की देखरेख करने के लिए अधिकृत होते हैं। उनके अधिकार में मठ मंदिर की जमीन बेचना, उसके आय का व्यय निजी कार्यों में करना नहीं होता है।


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