बेनीपट्टी (मधुबनी) : पत्रकार सह आरटीआई कार्यकर्ता बुद्धिनाथ झा उर्फ अविनाश के अपहरण बाद हत्या के खिलाफ न्याय की उम्मीद लगाए परिजनों की सब्र की सीमा टूटती जा रही है। हालात ऐसे हैं कि 62 वर्ष की उम्र में अपने छोटे बेटे अविनाश को खोने का गम लिए पिता दयानंद झा पिछले 15 दिनों से अन्न त्यागे हुए हैं।

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अविनाश के गायब होने के बाद से अब तक पिता दयानंद झा ने अन्न ग्रहण नहीं किया है। परिजनों का हाल बेहाल है, परिवार के सदस्यों व ग्रामीणों के समझाने के बावजूद भी वह मान नहीं रहें। वह कहते हैं कि जब तक मेरे बेटे के कातिलों का पता प्रशासन नहीं लगाती है तब तक वह अन्न ग्रहण नहीं करेंगे। वहीं रुंधे गले से वह यह भी कहते हैं कि अब भी प्रशासन से उम्मीद है, बेनीपट्टी थाना के बड़ा बाबू कहकर गए थे कि वह जल्द ही मेरे बेटे के कातिलों को पकड़ लेंगे, लेकिन अब तक कोई खबर नहीं है।


दयानंद झा कहते हैं कि रोज सुबह इसी उम्मीद में आंखें खुलती है कि कहीं अखबार में कोई खबर मिले की अविनाश के कातिलों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यहां तक कि जिनकी अब तक गिरफ्तारी हुई है, उन लोगों कि इस कांड में किस तरह से किसी संलिप्तता है वह भी पुलिसवाले नहीं बता पा रहे हैं। 

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अविनाश के गए 15 दिन हो गए, लेकिन प्रशासन व नेताओं के द्वारा दिये गए सारे आश्वासन अब हवा हवाई लगने लगे हैं। आगे श्री झा ने कहा कि अगर यहां का प्रशासन व विधायक, एमएलसी, सांसद मेरे बेटे को न्याय नहीं दिलवा सकते हैं तो उन्हें मेरे श्रद्धांजलि में भी जल्द आने का मौका मिलेगा।


जानकारी के लिए बता दें कि 9 नवम्बर को पत्रकार सह आरटीआई कार्यकर्ता बुद्धिनाथ झा उर्फ अविनाश अपने घर के पास स्थित ऑफिस से 10 बजे रात में फोन पर बात करते हुए निकला। जिसके बाद से वह वापस नहीं लौट सका। 10 नंवबर को परिजनों को उसके अपहरण होने का अंदेशा हुआ जिसके बाद पुलिस को जानकारी दी गई। इधर परिजन व पुलिस उसकी तलाश में जुटी रही, वहीं 3 दिन बाद 12 नवम्बर को अधजली अवस्था में उसकी लाश उड़ेन गांव से आगे स्टेट हाईवे के किनारे मिली थी।


शव बरामदगी के 24 घन्टे के भीतर बिना अनुसंधान, बिना पोस्टमार्टम रिपोर्ट आये मधुबनी एसपी डॉ. सत्यप्रकाश ने अविनाश की हत्या की वजह प्रेम प्रंसग बता दिया था, जिसके कारण लोगों का आक्रोश फुट पड़ा। जिसके प्रतिकार में 14 नंवबर को बेनीपट्टी बाज़ार को बंद रखकर जमकर प्रदर्शन किया गया था। जिसके बाद उसी शाम में एसपी ने एक प्रेस रिलीज जारी कर यह स्पष्ट किया था कि अविनाश की हत्या की वजह अब तक पुलिस नहीं तलाश पाई है और अब तक प्राथमिक जांच में एक अस्पताल की नर्स समेत 6 कई गिरफ्तारी हुई है।


यह गिरफ्तारियां 14 नंवबर को हुई। जिसके बाद से अब तक पुलिस का अनुसंधान कहाँ पहुंचा यह भी पुलिस बताने में नाकाम है। 


पुलिस के पास जवाब नहीं है कि अविनाश की हत्या किस वजह से हुई है। अविनाश की हत्या अगर 9 नंवबर की रात में ही हुई तो दो दिनों तक उसका लाश कहाँ रखा गया था। अविनाश को अंतिम बार 9 नंवबर की रात कटैया रोड की तरफ जाते हुए देखा गया था, और 12 को उसका अधजला शव उड़ेंन गांव से आगे स्टेट हाईवे के किनारे मिला तो उसके शव को वहां तक कैसे, और कौन ले गया ? अविनाश का मोबाइल कहां है ? अविनाश की छाती की हड्डी कैसे टूटी ? जैसे करीब दर्जनों सवाल है जो अब भी जवाब की तलाश में है।


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