बाबा गाण्डीवेश्वर नाथ के दरबार से खाली हाथ नहीं जाते श्रद्धालु - BNN News

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7 Aug 2018

बाबा गाण्डीवेश्वर नाथ के दरबार से खाली हाथ नहीं जाते श्रद्धालु

बेनीपट्टी(मधुबनी)। बेनीपट्टी के शिवनगर स्थित बाबा गाण्डीवेश्वर नाथ महादेव मंदिर महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। मुख्यालय से करीब 12 किमी दूर पश्चिमी कोणे पर विराजमान साक्षात महादेव के दर्शन व जलापर्ण से सारे कष्ट दूर हो जाते है। किवंदती है कि शिवनगर के गाण्डीवेश्वर नाथ महादेव मंदिर में ही पांडव पुत्र अर्जुन को महादेव ने अपने प्रिय धनुष गाण्डीव वरदान स्वरुप दिया था। जिससे अर्जुन ने कौरवो का नाश कर दिया था। मंदिर के पंडाओं की माने तो इस मंदिर में महादेव सवा पहर विराजमान होते है। इस काल में शिवलिंग का रंग काला स्याह हो जाता है। वहीं आरती के समय निर्जन वन से बांसुरी की आवाज आज भी श्रद्धालुओं को कौतुहल में डाल देता है। किवदंती है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव पुत्र इस क्षेत्र में काफी दिनों तक अज्ञातवास काटे थे। बताया जा रहा है कि तब ये इलाका पूरी तरह से निर्जन वन हुआ करती थी। बताया जाता है कि इस वन में पांडव वास करते थे। इसी दौरान एक रात अर्जुन के स्वपन आया कि उसके सिर के नीचे महादेव का शिवलिंग है। अर्जुन अचानक उठ गया, और वहां खुदाई कि तो साक्षात शिवलिंग मिला। जिसकी विधिवत् पूजा किए जाने के बाद महादेव ने अर्जुन को दर्शन देकर वरदान मांगने को कहा, किवदंती है कि अर्जुन ने कौरव से धर्मयुद्ध जीतने के लिए गाण्डीव की मांग कर दी। महादेव ने अर्जुन की तपस्या से खुश होकर उसे गाण्डीव धनुष दिया। दावा, किया जाता है कि इसी गाण्डीव के कारण इस स्थल का नाम गाण्डीवेश्वर नाथ महादेव मंदिर के नाम पर प्रचलित हो गया। गौरतलब है कि इसी मंदिर से करीब पांच किमी पश्चिम बाबा बाणेश्वरनाथ महादेव मंदिर विराजमान है। इधर, सावन के पवित्र माह में बाबा गाण्डीवेश्वर नाथ महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।

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