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22 Jul 2018

बसैठ उच्च विद्यालय के भवन निर्माण की मांग को लेकर एमएसयू ने डीकेबीएम पथ को किया जाम

बेनीपट्टी(मधुबनी)। बसैठ के सीता मुरलीधर उच्च विद्यालय सह प्लस टू के भवन निर्माण की मांग को लेकर मिथिला स्टूडेंट यूनियन के सदस्यों ने शुक्रवार की सुबह करीब आठ बजे बसैठ चौक पर डीकेबीएम पथ को जाम कर मांग के समर्थन में जमकर नारेबाजी की। जामकर्ताओं ने शिक्षा विभाग व राज्य सरकार पर शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं होने का आरोप लगाते हुए कहा कि बसैठ के उच्च विद्यालय को प्लस टू का दर्जा दिए जाने के बाद भी भवन निर्माण के लिए आवंटित राशि एक राजनीतिक सोच के कारण वापस करा दी गयी। जिसके कारण छात्रों को प्लस टू की पढ़ाई तो दूर माध्यमिक शिक्षा से भी वंचित होना पड़ रहा है। स्कूल में नामांकित करीब एक हजार छात्रों के लिए कमरों का घोर अभाव बना हुआ है। वार्षिक परीक्षा मैदान में बैठा कर ली जाती है। वहीं एमएसयू ने जनप्रतिनिधियों को भी जमकर कोसा। जनप्रतिनिधियों पर सिर्फ वोट की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जो छात्र देश के भविष्य है, उसके भविष्य के नींव के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। गौरतलब है कि मिथिला स्टूडेंट यूनियन के इससे पूर्व 12 जुलाई को स्कूल भवन के निर्माण की मांग को लेकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय का घेराव किया था। उधर, जामकर्ताओं ने बसैठ के मुख्य चौराहा पर टायर फूंक कर विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर स्कूल के भवन निर्माण की मांग की।उधर, जाम के करीब पांच घंटों के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी श्री राम कुमार, एसएचओ सह पुलिस निरीक्षक हरेराम साह, बीडीओ मनोज कुमार व बीईओ मीना कुमारी मौके पर पहुंच कर जामकर्ताओं से समस्याओं के संदर्भ में पूर्ण जानकारी लेकर एमएसयू के सदस्यों को जल्द ही स्कूल भवन निर्माण के लिए पहल किए जाने की लिखित जानकारी देकर जाम हटवाया। उपरांत डीईओ ने बसैठ के उच्च विद्यालय पहुंच कर स्कूल की स्थिति से वाकिफ होकर जल्द ही पहल किए जाने की बात कही। बता दें कि बसैठ के सीता मुरलीधर उच्च विद्यालय में कमरों का घोर अभाव वर्षों से बना हुआ है। स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब एक हजार नामांकित छात्रों के स्कूल में मात्र एक कमरा पठन-पाठन योग्य है। स्कूल प्रबंधन के लापरवाही से स्कूल के भवन के लिए प्राप्त करीब 39 लाख रुपये वापस हो गए। जिसका खामियाजा, छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। एमएसयू ने हाल ही में भिक्षाटन कर हजारों रुपये इकठ्ठा कर स्कूल के छतों की मरम्मत कराई। लेकिन, छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण उक्त मरम्मत उंट के मूंह में जीरा वाली कहावत चरितार्थ होती दिख रही है।

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