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19 Jun 2018

चार दर्जन से अधिक स्कूल भवन के क्षतिग्रस्त होने के बाद भी होती है पढ़ाई

बेनीपट्टी(मधुबनी)। शिक्षा महकमा के अधिकारियों के अड़ियल रवैया के कारण स्कूली छात्रों के भविष्य पर सवाल उठ रहा है। स्कूली भवन के लिए राशि आवंटित नहीं किए जाने के कारण बेनीपट्टी प्रखंड के करीब चार दर्जन से अधिक क्षतिग्रस्त स्कूल भवन में छात्रों को बैठा कर पढ़ाई कराई जाती है। जिसके कारण कब कोई बड़ी दुर्घटना हो जाए, कहना मुश्किल है। गत तीन दिन पूर्व इसी क्षतिग्रस्त चहादिवारी में दबने से कटैया गांव के यशराज ठाकुर की मौत मौके पर ही हो गई। मासूम की मौत के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आते हुए तत्काल विभागीय अधिकारियों के साथ जांच की, लेकिन अहम सवाल है कि आखिर, विभाग किसी के मौत हो जाने के बाद ही हरकत में क्यूं आती है। कटैया में हुए लापरवाही की जांच की जा चुकी है। अब सवाल है कि उस यशराज के मौत का जिम्मेदार कौन है। स्कूली भवनों की गुणवत्ता की जांच के लिए सर्व शिक्षा अभियान के अभियंता भी होते है। बावजूद अभियंता ऐसे स्कूली भवन अथवा क्षतिग्रस्त चहारदिवारी को तोड़ने के लिए पहल क्यूं नहीं करते है। कई सवाल है, जो आज भी निरुत्तर बन कर फिजां में तैर रहे है। वहीं सूत्रां की माने तो अधिकांश स्कूल भवनों के निर्माण में विभागीय मिलीभगत से इस कदर लूटखसोट की जाती है, कि अधिकांश भवन समय से पूर्व ही दम तोड़ देते है। गौरतलब है कि गत वर्ष स्कूल भवन की राशि का उठाव कर भवन निर्माण नहीं करने पर विभाग ने करीब आधा दर्जन विद्यालय के प्रभारियों पर प्राथमिकी दर्ज कराई। बावजूद स्थिति में कोई व्यापक सुधार नहीं हो पाया। अब भी कई ऐसे स्कूल के प्रभारी है, जो भवन निर्माण की राशि का उठाव कर भवन निर्माण की सामाग्री सस्ता होने का इंतजार कर रहे है। बता दें कि अंधरी के उत्क्रमित मध्य विद्यालय के पूर्व एचएम भवन निर्माण की राशि करीब पूर्ण उठाव कर चुके। जबकि स्कूल का भवन अधर में ही लटका रह गया। इसी बीच तत्कालीन एचएम की मौत हो गई। विभाग ने उक्त एचएम के स्थान पर उनके पुत्र को अनुकंपा पर बहाल कर दिया, लेकिन भवन निर्माण में अधिक निकासी के मामले पर चुप्पी साध लिए। फलस्वरुप, आज भी स्कूल भवन अधर में लटका हुआ है। जबकि विभागीय नियम है कि भवन निर्माण की स्थिति पर ही निकासी के लिए एनओसी दिया जाता है। अब सवाल है कि अभियंता स्कूल भवन की बिना जांच किए ही किस प्रकार राशि निकासी के लिए हरी झंडी दिखा दी। सूत्रों की माने तो उक्त स्कूल के भवन निर्माण में लाखों रुपये का बंदरबांट किया जा चुका है। जिसके कारण विभाग शिथिलता बरत रही है।
          स्कूल स्थापना के बाद भी नहीं निर्माण हुआ स्कूल भवन
शिक्षा विभाग के लापरवाही का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है, कि बेनीपट्टी के कई स्कूल कागज पर स्थापित तो हो गए, लेकिन स्कूल का भवन अब तक निर्माण ही नहीं हुआ। बेनीपट्टी के मुस्लिम बहुल चम्मा टोल में नवसृजित प्राथमिक विद्यालय का भवन निर्माण नहीं होने से चम्मा टोल का प्राथमिक विद्यालय, नूरी टोल बेनीपट्टी के भवन में संचालित कराई जा रही है। जबकि नूरी टोल के स्कूल में पूर्व से ही भवन की किल्लत बनी हुई है। इस भवन की कमी के आड़ में योजनाओं की जमकर अनियमितता की जा रही है। वहीं दूसरी ओर जरैल का प्राथमिक विद्यालय को भी अब तक भवन नसीब नहीं हो सका है। फिलवक्त प्राईमरी स्कूल मध्य विद्यालय में संचालित कराई जा रही है। देपुरा नया टोल के प्राईमरी स्कूल भवन के अभाव में आंगनबाड़ी केन्द्र में संचालित की जा रही है। नगवास के प्राईमरी स्कूल के छात्रों को भवन के अभाव में माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाई कराई जा रही है। वहीं स्कूल भवन में अनियमितता की बात करें तो हिब्बा के प्राईमरी स्कूल के निर्माण में इस कदर अनियमितता की गई कि अब तक स्कूल के भवन को छत नसीब ही नहीं हुआ है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्कूल में नामांकित छात्र किस प्रकार खुले आसमान के तले गर्मी व बारिश में किस तरह पढ़ाई कर रहे हांगे। वहीं महमदपुर के मध्य विद्यालय, बिरौली के मध्य विद्यालय, धकजरी के मध्य विद्यालय समेत कई विद्यालय के भवन निर्माण में व्यापक स्तर पर लूटखसोट की गई है। जिसकी बारिकी से जांच हो तो विभागीय कर्मियों के साथ कई शिक्षक लपेटे में आ सकते है।
     भूकंप के खतरनाक जोन में भी क्षतिग्रस्त स्कूलों में हो रही पढ़ाई
आपदा के सबसे खतरनाक जोन में मधुबनी जिला का नाम शुमार है। भूकंप व बाढ़ की त्रासदी को लगातार झेलने के बाद भी क्षतिग्रस्त स्कूल भवनों में स्कूल का संचालन दुर्घटनाओं को आमंत्रित कर रहा है। बेनीपट्टी के कटैया महादलित टोल के प्राईमरी विद्यालय, चानपुरपट्टी का नवसृजित प्राईमरी स्कूल, लोहारपट्टी का प्राईमरी स्कूल, नूरी टोल का उर्दू प्राईमरी स्कूल का भवन वर्षों से क्षतिग्रस्त अवस्था में है। वहीं सबसे खतरनाक स्थिति में नागदह का प्राईमरी मकतब का स्कूल भवन है। जहां कब भवन जमींदोज हो जाए, कहना मुश्किल है। विभागीय जानकारी के अनुसार बेनीपट्टी में करीब चार दर्जन से अधिक ऐसे स्कूल भवन है, जो खतरनाक स्थिति में है।
           स्कूल भवन के स्थिति की समीक्षा कर होगी कार्रवाई
स्कूल भवन के क्षतिग्रस्त होने पर एसडीएम मुकेश रंजन ने बताया कि जल्द ही शिक्षा पदाधिकारी से ऐसे स्कूल भवन की रिपोर्ट ली जाएगी। भवनों की स्थिति की समीक्षा कर निर्माण के लिए पहल किया जाएगा। वहीं प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी मीना कुमारी ने बताया कि स्कूल भवन की स्थिति में वरीय अधिकारी को अवगत कराया जाएगा।

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